उत्तराखंड

सड़क किनारे मिला गुलदार का शव, वाहन की चपेट से हुई मौत

सड़क किनारे मिला गुलदार का शव, वाहन की चपेट से हुई मौत

भिलंगना वन रेंज के अंतर्गत घनसाली-चमियाला मोटर मार्ग पर सड़क किनारे गुलदार का शव पड़ा मिला। वन विभाग के मुताबिक किसी वाहन से टकराने से उसकी मौत की वजह मानी जा रही है। गैस गोदाम से करीब 500 मीटर की दूरी पर सुबह लोगों ने गुलदार का शव देखा तो …

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कच्ची उम्र में खतरनाक खिलौना है स्मार्ट फोन

सहसपुर में आठ साल की बच्ची के साथ गैंगरेप की घटना सिर्फ एक आपराधिक कृत्य नहीं है। इस घटना में सबसे असामान्य बात यह है कि नौ से 14 वर्ष के पांच बच्चों ने इसे अंजाम दिया। इन बच्चों ने मोबाइल में पोर्न मूवी देखकर पूरी घटना को प्लान किया। इस घटना से उन माता-पिता के सामने भी सवाल खड़ा कर दिया है, जो अपने बच्चों को मोबाइल फोन सिर्फ एक खिलौना मानकर दे देते हैं। अभिभावकों को इस बात को समझना होगा कि स्मार्ट फोन महज कार्टून फिल्मों और हल्के-फुल्के मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा। इंटरनेट की दुनिया ने इसे ऐसे माध्यम से भी जोड़ दिया है, जहां अश्लीलता का अंधा संसार भी है, जो अबोध बच्चों के लिए और भी खतरनाक है। छोटे बच्चों का दिमाग जिज्ञासा से भरा और प्रयोगधर्मी होता है। वह नफा-नुकसान की परिभाषा से दूर हर उस बात को खुद पर लागू करना चाहते हैं, जो वह देख रहे हैं। सहसपुर की घटना का भी इस नासमझी से गहरा ताल्लुक है। पोर्न मूवी देखकर आठ साल की बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म करने वाले नाबालिग बच्चों के अभिभावक यदि समय रहते इस आशंका को भांप लेते तो शायद यह अनहोनी घटती ही नहीं। परिवहन विभाग ने दिया ऐसा फैसला, शहर से कभी नहीं हटेंगे विक्रम व ऑटो यह भी पढ़ें न्यूरो साइकोलॉजिस्ट डॉ. सोना कौशल की मानें तो यौन उत्पीड़न के बढ़ते मामलों के लिए सबसे ज्यादा इंटरनेट दोषी है। आज हर मोबाइल फोन में इंटरनेट है। जिसमें आने वाला हर कुछ बच्चे देख रहे हैं। उनका कहना है कि फिल्मों में परोसी जा रही अश्लीलता, टीवी शो, सीरियल भी इसके लिए दोषी हैं। सच्चाई के नाम पर टीवी में कई ऐसी घटनाएं भी दिखाई जा रही हैं, जो बच्चों के दिमाग पर गलत असर डाल रही हैं। अगर अभिभावक समय रहते सजग नहीं हुए तो इसके भयानक परिणाम सामने आते रहेंगे।

सहसपुर में आठ साल की बच्ची के साथ गैंगरेप की घटना सिर्फ एक आपराधिक कृत्य नहीं है। इस घटना में सबसे असामान्य बात यह है कि नौ से 14 वर्ष के पांच बच्चों ने इसे अंजाम दिया। इन बच्चों ने मोबाइल में पोर्न मूवी देखकर पूरी घटना को प्लान किया। …

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यात्री किराया बढ़ाने में ठिठक रहे राज्य परिवहन प्राधिकरण के कदम, जानिए वजह

राज्य के भीतर वाहनों में यात्री किराया व माल भाड़ा बढ़ाने के निर्णय को लागू करने में राज्य परिवहन प्राधिकरण के कदम ठिठक रहे हैं। तकरीबन एक पखवाड़े पहले किराया बढ़ाने के निर्णय को अभी तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। इससे वाहन संचालकों में भी रोष बढ़ रहा है। राज्य परिवहन प्राधिकरण की तीन जुलाई को हुई बैठक में व्यावसायिक वाहनों में यात्री किराया व माल भाड़ा लगाने पर मुहर लगी थी। इस दौरान यह निर्णय लिया गया था कि वाहनों का किराया कुछ वाहनों में किलोमीटर व कुछ में एकमुश्त बढ़ाया जाएगा। यह भी कहा गया कि चूंकि, हर प्रकार के वाहन का किराया किलोमीटर के हिसाब से अलग-अलग है इसलिए वाहनों के प्रकार के हिसाब से इनकी दरों का निर्धारण कर इन्हें सार्वजनिक किया जाएगा। इस निर्णय के बाद से ही वाहन संचालक एसटीए के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। दरअसल, प्रदेश में लंबे समय से बस, विक्रम, टैंपो, टैक्सी व ट्रक संचालक किराया बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। एसटीए द्वारा वर्ष 2012 के बाद से इनका किराया नहीं बढ़ाया गया है। इसे देखते हुए शासन के निर्देश पर परिवहन मुख्यालय ने किराया निर्धारण समिति का गठन किया था। इस समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में किराया बढ़ाने को संस्तुति की थी। समिति की रिपोर्ट के बाद दो बार एसटीए की बैठकें हुई लेकिन इन पर कोई निर्णय नहीं हो पाया। उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में कर रहे हैं सफर तो हो जाइए सावधान यह भी पढ़ें इसी माह यानी तीन जुलाई को हुई बैठक में किराया बढ़ोतरी पर मुहर लगी थी लेकिन इसके आदेश अभी तक जारी नहीं हो पाए हैं। हालांकि, जानकारों की मानें तो पुलिस मुख्यालय में किराया सूची तैयार हो रखी है लेकिन बैठक के कार्यवृत्त में अभी तक अधिकारियों व नामित सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं। इसके चलते यह सूची नहीं जारी हो पा रही है। अपर परिवहन आयुक्त व सचिव एसटीए सुनीता सिंह का कहना है कि किराया बढ़ोतरी के संबंध में जल्द सूची जारी कर दी जाएगी।

राज्य के भीतर वाहनों में यात्री किराया व माल भाड़ा बढ़ाने के निर्णय को लागू करने में राज्य परिवहन प्राधिकरण के कदम ठिठक रहे हैं। तकरीबन एक पखवाड़े पहले किराया बढ़ाने के निर्णय को अभी तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। इससे वाहन संचालकों में भी रोष बढ़ रहा …

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बोलेरो के खार्इ में गिरने से चार की मौत, कर्इ घायल

खटीमा से चंपावत आ रही एक बोलरो अनियंत्रित होकर अचानक खार्इ में गिर गर्इ। हादसे में चार लोगों की मौत की खबर हैं। जबकि, छह लोगों के घायल होने की सूचना है। घायलों का रेस्क्यू किया जा रहा है। ऊधमसिंह नगर जिले के खटीमा से चंपावत आ रही बोलेरो धौंन के पास अचानक खाई में गिर गर्इ। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, आपदा और चिकित्सा विभाग की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस सभी घायलों को खार्इ से बाहर निकालने में जुटी हुर्इ है। दुर्घटना में घायल हुए तीन लोगों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। घायलों में वाहन चालक भुवन तिवारी(28 वर्ष) पुत्र गणेश दत्त निवासी चारुबेटा खटीमा के सिर में चोट है और हाथ फ्रैक्चर है। वहीं महेंद्र सिंह(35 वर्ष) पुत्र भूप सिंह निवासी मुआनी पिथौरागढ़ के सिर में चोट आई है। अल्मोड़ा निवासी राम नाथ पुत्र गणेश नाथ कक्षा पांचवी का छात्रा भी घायल हुआ है। ट्रक और कार की भिड़ंत, कार चालक की मौत; एक घायल यह भी पढ़ें अन्य घायलों को जिला अस्पताल लाया जा रहा है। वहीं बताया जा रहा कि जब बोलेरो खार्इ में गिर रही तो उसवक्त ड्राइवर वाहन से छिटककर बाहर गिर गया था। जिसके चलते उसकी जान बच गया।

खटीमा से चंपावत आ रही एक बोलरो अनियंत्रित होकर अचानक खार्इ में गिर गर्इ। हादसे में चार लोगों की मौत की खबर हैं। जबकि, छह लोगों के घायल होने की सूचना है। घायलों का रेस्क्यू किया जा रहा है।  ऊधमसिंह नगर जिले के खटीमा से चंपावत आ रही बोलेरो धौंन …

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ब्लॉक स्तर पर जारी होगा वेदर बुलेटिन, किसानों को मिलेगा इसका लाभ

जल्द ही विकासखंड स्तर पर भी कृषि मौसम परामर्श संबंधित बुलेटिन जारी किया जा सकेगा। प्रायोगिक स्तर पर देश में कुल 50 केंद्रों को इसके लिए विकसित किया जा रहा है। रुड़की, उत्तराखंड स्थित आइआइटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) भी इन केंद्रों में शामिल है। ग्रामीण कृषि मौसम सेवा परियोजना के तहत फिलहाल 130 केंद्रों से जिला स्तर पर पूर्वानुमान और अलर्ट जारी किया जाता है। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और भारतीय मौसम विभाग की ओर से ग्रामीण कृषि मौसम सेवा परियोजना का विस्तार विकासखंड स्तर पर किया जाना है। ताकि किसानों को ठीक अपने इलाके के मौसम की सटीक जानकारी मिल सके। आइआइटी रुड़की स्थित केंद्र द्वारा प्रायोगिक स्तर पर इसकी शुरुआत कर दी गई है। संस्थान केजल संसाधन विकास एवं प्रबंधन विभाग में संचालित ग्रामीण कृषि मौसम सेवा परियोजना के नोडल अधिकारी डॉ. आशीष पांडेय ने बताया कि प्रायोगिक तौर पर हरिद्वार जिले में रुड़की, नारसन, बहादराबाद और लक्सर ब्लॉक को चुना गया है। इन विकासखंडों के लिए विशेष उपकरण स्थापित कर उस इलाके के लिए मौसम की सटीक जानकारी जुटाई जा रही है। गंगनहर में डूबने वालों को जलवीर का आसरा, यह शख्‍स बचा चुका 187 लोगों की जान यह भी पढ़ें यहां टोडा कल्याणपुर गांव में स्वचालित मौसम वेधशाला स्थापित की है, जो नियमित रूप से डाटा उपलब्ध करा रही है। किसानों को आठ पैरामीटर पर मौसम से संबंधित यह जानकारी सप्ताह में दो बार मंगलवार व शुक्रवार को उपलब्ध कराई जाती है। इसमें अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान, अधिकतम एवं न्यूनतम आर्द्रता, बरसात, बादल आच्छादन और हवा की गति एवं दिशा शामिल हैं। असामान्य मौसम होने पर मौसम अलर्ट जारी होता है, ताकि किसान फसलों का सही रख-रखाव और सिंचाई कर सकें। बाबा रामदेव ने लंदन के तुसाद म्यूजियम में बिताए तीन घंटे, हुई शारीरिक नापजोख यह भी पढ़ें डॉ. केके सिंह, (प्रमुख, कृषि मौसम सलाह सेवाएं अनुभाग, भारतीय मौसम विभाग, नई दिल्ली) का कहना है कि मंत्रालय ने मानसून-2018 से ग्रामीण कृषि मौसम सेवा परियोजना का विकासखंड स्तर तक विस्तार किया है। यह फिलहाल प्रायोगिक चरण में है। निकट भविष्य में इसका व्यापक विस्तार संभव हो सकेगा। किसानों के लिए टोल फ्री नंबर भी इस युवक ने पेश की मिसाल, सगाई में दहेज के रूप में मांगी यह चीज यह भी पढ़ें किसान अब एकीकृत टोल फ्री फोन नंबर 011-24357276 पर भी अपने क्षेत्र के मौसम का पूर्वानुमान प्राप्त कर सकते हैं। नंबर डायल करने पर इस योजना का कोड पूछा जाएगा, जो 4487 है। डॉ. केके सिंह, प्रमुख, कृषि मौसम सलाह सेवाएं अनुभाग, भारतीय मौसम विभाग, नई दिल्ली ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि एम-किसान पोर्टल पर जाकर भी किसान एसएमएस सेवा से जुड़ सकते हैं। देशभर के 550 जिलों के तीन करोड़ से अधिक किसानों को एसएमएस के माध्यम से जिला स्तर पर मौसम की जानकारी नियमित रूप से भेजी जा रही है। जल्द ही एप बेस्ड सेवा भी लॉंच की जा रही है। यह राज्य स्तर पर होगी। हरियाणा में एप विकसित किया जा चुका है। इसके माध्यम से केवल मौसम ही नहीं बल्कि कृषि सलाह भी मुहैया होगी।

जल्द ही विकासखंड स्तर पर भी कृषि मौसम परामर्श संबंधित बुलेटिन जारी किया जा सकेगा। प्रायोगिक स्तर पर देश में कुल 50 केंद्रों को इसके लिए विकसित किया जा रहा है। रुड़की, उत्तराखंड स्थित आइआइटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) भी इन केंद्रों में शामिल है। ग्रामीण कृषि मौसम सेवा परियोजना के …

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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उदयवीर सिंह का निधन

दून निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उदयवीर सिंह पंवार का को निधन हो गया। वे करीब 101 साल के थे। पिछले एक सप्ताह से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। उनके निधन की सूचना से शहर में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने स्वर्गीय पंवार के आवास पहुंचकर शोक जताया व परिवार को सांत्वना दी। वे यहां हाथीबड़कला में बड़े बेटे सुरेश पंवार के साथ रहते थे। वे वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआइ) में फोटोग्राफर पद से वर्ष 1988 में सेवानिवृत्त हुए थे। लंबी उम्र और शतायु होने के बावजूद वे किसी पर निर्भर नहीं थे और अपना दैनिक कार्य खुद करते थे। उनके परिवार के मुताबिक, उन्होंने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और जेल भी गए। इसके बाद नमक तोड़ो आंदोलन में भी वे सक्रिय रहे और जेल गए। उनके परिवार में पत्नी शकुंतला देवी, दो बेटे सुरेश पंवार व नरेश पंवार और तीन विवाहित बेटियां हैं। बेटे सुरेश ने बताया कि सुबह से पिताजी थोड़ा परेशान दिख रहे थे। उन्होंने नाश्ता भी नहीं लिया, सिर्फ चाय पी। इसके बाद उनका निधन हो गया। दुनिया को अलविदा कह गए राज्य आंदोलनकारी वेद उनियाल यह भी पढ़ें राज्य आंदोलनकारी की मां का निधन उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेती की मां सुलोचना देवी का निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहीं थीं और गत शनिवार को उन्हें दिल्ली एम्स में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। इससे पहले काफी दिन दून में अलग-अलग जगह भी उनका उपचार चला। वे 66 वर्ष की थीं। इस स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को मौत के बाद मिला इंसाफ यह भी पढ़ें राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन नेगी, सचिव रामलाल खंडूड़ी, सलाहाकार ओमी उनियाल, रविंद्र जुगरान, विजयेश नवानी समेत दर्जनों आंदोलनकारी उनके आवास पहुंचे और शोक जताया।

दून निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उदयवीर सिंह पंवार का को निधन हो गया। वे करीब 101 साल के थे। पिछले एक सप्ताह से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। उनके निधन की सूचना से शहर में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने स्वर्गीय पंवार …

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दून में भूजल का रिचार्ज कम, गिरावट अधिक

केंद्रीय भूजल बोर्ड के ताजा आंकड़े भूजल की उल्टी गिनती शुरू होने की कहानी बयां कर रहे हैं। वर्ष 2006 से 2015-16 के बीच किए गए अध्ययन में पता चला है कि भूजल रिचार्ज होने की दर कम है, जबकि भूजल के रसातल में जाने की दर कहीं अधिक है। दून में मई, अगस्त, नवंबर और जनवरी में भूजल में अधिकतम रिचार्ज 10.16 मीटर का रहा। जबकि, इसके नीचे जाने की दर 14.83 मीटर रही। केंद्रीय भूजल बोर्ड ने दून के 19 स्टेशनों में मानसून पूर्व (मई), मानूसन (अगस्त) और मानसून के बाद (नवंबर व जनवरी) में भूजल की स्थिति का आकलन किया। इसमें विभिन्न सीजन में निर्धारित स्टेशनों में भूजल के रिचार्ज व उसके स्तर के नीचे जाने की स्थिति पता की गई। अध्ययन में प्राप्त आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। पता चला कि मानसून सीजन अगस्त माह में ही सबसे अधिक 10.5 स्टेशन में भूजल स्तर में चार मीटर से अधिक ऊपर चढ़ा। जबकि, भूजल स्तर नीचे जाने की बात करें तो चार मीटर से अधिक की कमी जनवरी माह में अधिकतम 35.29 स्टेशन में रही। उत्तराखंड में 17 साल में हुए 843 सड़क हादसे, ढाई हजार लोगों की हुई मौत यह भी पढ़ें अध्ययन में शामिल अन्य जिलों (हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर, नैनीताल व चंपावत) में चंपावत (50 फीसद स्टेशन) को छोड़कर दून जैसी गिरावट कहीं पर भी दर्ज नहीं की गई। चंपावत पर्वतीय जिला है और वहां भूजल स्तर पहले से ही काफी नीचे है। ऐसे में दून की गिरावट आनुपातिक रूप से सबसे अधिक मानी जा सकती है।

केंद्रीय भूजल बोर्ड के ताजा आंकड़े भूजल की उल्टी गिनती शुरू होने की कहानी बयां कर रहे हैं। वर्ष 2006 से 2015-16 के बीच किए गए अध्ययन में पता चला है कि भूजल रिचार्ज होने की दर कम है, जबकि भूजल के रसातल में जाने की दर कहीं अधिक है। …

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एनएच 74 मुआवजा घोटाले में निलंबित पीसीएस अधिकारी ने किया सरेंडर

एनएच 74 मुआवजा घोटाले में निलंबित पीसीएस तीरथ पाल ने आज एसआइटी के समक्ष सरेंडर कर दिया। इसके बाद पुलिस पूछताछ को उसे गुप्त स्थान पर ले गई। पुलिस के मुताबिक इसके बाद उसे नैनीताल कोर्ट में पेश किया जाएगा। गदरपुर तहसील की जांच में बैक डेट पर 143 के 3 मामले में निलंबित पीसीएस तीरथ पल के हस्ताक्षर मिले थे। इस पर पुलिस ने उसकी तलाश में देहरादून में दबिश दी, लेकिन वह नहीं मिले। सोमवार को तीरथ ने एसआइटी ऑफिस पहुंचकर सरेंडर किया। करीब 300 करोड़ का है एनएच-74 मुआवजा घोटाला मार्च 2017 में तत्कालीन आयुक्त कुमाऊं ने एनएच-74 मुआवजा घोटाले की आशंका जताई। इस पर 11 मार्च को एडीएम प्रताप सिंह शाह की तहरीर पर सिडकुल चौकी में केस दर्ज हुआ था। इसके बाद एसआइटी का गठन कर जांच शुरू की गई। तब से एसआइटी जसपुर, बाजपुर, काशीपुर, रुद्रपुर, गदरपुर, सितारगंज, किच्छा तहसील के 345 से अधिक काश्तकारों से पूछताछ कर चार पीसीएस अधिकारी समेत 18 आरोपितों को जेल भेज चुकी है। साथ ही दो पीसीएस समेत 12 आरोपितों के खिलाफ 5804 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल कर 211 करोड़ रुपये के घोटाले की पुष्टि कर चुकी है। एसआइटी सूत्रों के मुताबिक वर्तमान में रुद्रपुर, गदरपुर, किच्छा तहसील के साथ ही बाजपुर तहसील के कुछ मामलों की जांच जारी है। एनएच मुआवजा घोटाले में प्रभारी तहसीलदार गिरफ्तार यह भी पढ़ें प्रभारी तहसीलदार को कोर्ट में पेश करने को पुलिस नैनीताल रवाना तीन मामले में बैक डेट पर 143 करने के आरोपी बेरीनाग के प्रभारी तहसीलदार को एसआईटी ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के लिए नैनीताल ले गई। बता दें कि गदरपुर में 2015 में कानूनगो रहे रघुवीर सिंह ने बैक डेट पर 3 मामलों में 143 की रिपोर्ट लगाई थी। इसमें एक किसान को दो करोड़ का मुआवजा भी मिला था, जबकि घोटाले की पुष्टि होने पर 2 किसानों का मुआवजा रोक दिया गया था। इस पर पुलिस ने रविवार को रघुवीर को गिरफ्तार कर लिया था। सोमवार को उससे पूछताछ के बाद पुलिस ने मेडिकल कराया। बाद में पुलिस उससे लेकर नैनीताल कोर्ट में पेश करने के लिए ले गए।

एनएच 74 मुआवजा घोटाले में निलंबित पीसीएस तीरथ पाल ने आज एसआइटी के समक्ष सरेंडर कर दिया। इसके बाद पुलिस पूछताछ को उसे गुप्त स्थान पर ले गई। पुलिस के मुताबिक इसके बाद उसे नैनीताल कोर्ट में पेश किया जाएगा। गदरपुर तहसील की जांच में बैक डेट पर 143 के …

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दो शावकों के साथ घूम रही बाघिन ने ग्रामीण पर किया हमला

खटीमा, उधमसिंह नगर [जेएनएन]: दो शावकों के साथ घूम रही एक बाघिन से ग्रामीण पर हमला कर दिया। इस घटना से ढाकी गांव के ग्रामीण सहमे हुए हैं। वहीं घायल को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना गत रात करीब 9:30 बजे की है। किशनपुर नानकमत्ता निवासी बूटा सिंह पुत्र बलविंदर सिंह दहा ढाकी गांव में ससुराल गया हुआ था। वह ससुराल से ही दवाई लेने के लिए मझोला गया और देर रात वापस लौटते हुए उसे खड़ंजा रोड दो शावकों को साथ बाघिन नजर आई। गन्ने के खेत से निकलकर उसके सामने बाघिन खड़ी हो गई। इससे उसके हाथ-पैर फूल गए। जब तक वह कुछ समझ पाता कि बाघिन ने हमला कर दिया। बूटा सिंह के चिल्लाने पर आसपास के ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे। तब तक बाघिन गन्ने के खेत की ओर चली गई। सूचना पर वन विभाग की टीम गांव पहुंची। जहां अब बाघिन की निगरानी की जा रही है। वहीं, इस घटना से क्षेत्र के लोगों में दहशत है। लोगों ने वन विभाग से बाघिन को पकड़ने की मांग की।

खटीमा, उधमसिंह नगर [जेएनएन]: दो शावकों के साथ घूम रही एक बाघिन से ग्रामीण पर हमला कर दिया। इस घटना से ढाकी गांव के ग्रामीण सहमे हुए हैं। वहीं घायल को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।   घटना गत रात करीब 9:30  बजे की है। किशनपुर नानकमत्ता …

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देहरादून में डीजल ऑटो का पंजीकरण बंद, मीटर अनिवार्य

शहर को प्रदूषणमुक्त करने की पहली कसरत के तहत सरकार ने देहरादून में डीजल ऑटो का पंजीकरण बंद कर दिया है। अब सिर्फ पेट्रोल, एलपीजी और इलेक्ट्रिक ऑटो ही पंजीकृत किए जाएंगे। ऑटो संचालकों की किराए में लूट-खसोट बंद करने को ऑटो में किराया मीटर लगाना भी अनिवार्य किया गया है। मीटर के बिना नए ऑटो पंजीकृत नहीं होंगे। पुराने डीजल ऑटो का परमिट अब नवीनीकृत नहीं होगा। पुराने पेट्रोल व एलपीजी ऑटो को किराया मीटर लगाने के लिए एक महीने की अस्थायी फिटनेस देने का फैसला लिया गया है। सरकार के इस फैसले को देहरादून आरटीओ में लागू कर दिया गया है। स्मार्ट सिटी के मद्देनजर यहां परिवहन सुविधाओं में भी सुधार किया जा रहा है। गत 20 फरवरी को हुई संभागीय परिवहन प्राधिकरण की बैठक में फैसला लिया गया था कि डीजल-पेट्रोल ऑटो शहर से बाहर होंगे और सिर्फ इलेक्ट्रिक ऑटो के परमिट को ही मंजूरी मिलेगी। इसके साथ ही एक मई से सभी ऑटो में मीटर लगाने का भी आदेश दिया गया। ऑटो संचालक इसका विरोध करते रहे। उत्तराखंड में सूर्यदेव के तेवर तल्ख, भूस्‍खलन से तीन घंटे बंद रहा यमुनोत्री हाईवे यह भी पढ़ें दून ऑटो रिक्शा यूनियन के अध्यक्ष बालेंद्र तोमर ने तो परेड ग्राउंड में कई दिन अनशन भी किया। इसके बाद परिवहन अधिकारियों ने मामला शासन तक ले जाने का भरोसा दिया था। शासन में ये तय हुआ कि फिलहाल नया पेट्रोल ऑटो पंजीकृत किया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यात्री किराये में हो रही 'लूट-खसोट' रोकने के लिए मीटर प्रणाली अनिवार्य होगी। यह व्यवस्था गत एक जून से लागू होनी थी लेकिन तकनीकी पेंच के चलते ऐसा नहीं हुआ। अब दो जुलाई से यह व्यवस्था लागू कर दी गई। आरटीओ सुधांशु गर्ग ने बताया कि आरटीए बैठक के फैसले के अनुसार अब केवल पेट्रोल, एलपीजी या इलेक्ट्रिक ऑटो ही पंजीकृत किए जांएगे, वो भी तब जब उनमें किराया मीटर लगा हो। इस फैसले से डीजल पर संचालित ऑटो अपनी फिटनेस अवधि के बाद खुद ही बाहर होते चले जाएंगे। अब बिना पंजीकरण नहीं कर पाएंगे भूजल दोहन यह भी पढ़ें ये हैं ऑटो चालकों के हाल पुलिस व परिवहन विभाग के द्वारा तय सख्त निर्देशों को धता बताते हुए शहर में ऑटो चालक यातायात व परिवहन नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं। चालक बिना वर्दी में ऑटो चलाते हैं तो मनमाफिक किराया लेना और जहां-तहां ऑटो खड़ा कर देना इनका शगल बन चुका है। इनकी मनमानी कहीं न कहीं पुलिस व परिवहन विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठाती है। ऋषिकेश में राफ्टिंग बंद होने से 2000 पर्यटक लौटे यह भी पढ़ें स्थिति यह है कि यात्रियों से मनमाना किराया लेने के साथ ही कईं दफा चालक अपनी दबंगई दिखाकर यात्रियों से अभद्रता भी करते हैं। रात में यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठा तय किराये से कई गुना ज्यादा किराया लेते हैं और यात्री अधिक किराया देने को मजबूर हो जाते हैं। जितने किराए में यात्री दिल्ली से बस में देहरादून आता है, उतना किराया ये लोकल में हड़प लेते हैं। वर्दी में बिना रहते हैं चालक शहर में बुधवार से अतिक्रमण पर चलेगा बुल्डोजर यह भी पढ़ें परिवहन विभाग द्वारा ऑटो चालकों के लिए भूरे रंग की वर्दी निर्धारित की गई है। इसके साथ ही वर्दी पर नेम प्लेट भी लगी होनी अनिवार्य है, लेकिन शहर में एक भी ऑटो चालक वर्दी में नहीं दिखता। ऐसे में किसी आपराधिक घटना में ऑटो चालक की पहचान कर पाने में दिक्कत होती है। ...दौड़ रहे पांच हजार ऑटो आरटीओ में पंजीकृत ऑटो की संख्या भले 2387 हो, लेकिन विभागीय सूत्रों की मानें तो शहर में 5000 से भी ज्यादा ऑटो दौड़ रहे हैं। इसका खुलासा अकसर होता रहता है। चेंकिंग में कई दफा फर्जी नंबरों एवं फर्जी परमिट पर दौड़ रहे ऑटो पकड़े जाते हैं। दो साल पूर्व परिवहन विभाग व पुलिस ने फर्जी ऑटो रोकने के लिए शहर के सभी ऑटो पर एक स्टीकर चस्पा किए थे, लेकिन विभागों की लापरवाही के चलते ये स्टीकर गायब हो गए। परिवहन विभाग चालकों का वेरिफिकेशन कर उन्हें कोड नंबर देने पर विचार कर रहा। कोड संख्या की वजह से यात्रियों को ऑटो पहचानने में आसानी होगी। फेल हो चुकी है प्रीपेड व्यवस्था वर्ष 2010 और 2013 में यातायात पुलिस ने रेलवे स्टेशन और आइएसबीटी से प्रीपेड ऑटो की व्यवस्था शुरू की थी लेकिन पुलिस और ऑटो संचालकों के गठजोड़ के चलते व्यवस्था ध्वस्त हो गई। वर्ष 2016 में पुलिस ने फिर यह व्यवस्था लागू की, लेकिन इसका पालन वर्तमान में भी पूरी तरह नहीं हो रहा। ऑटो चालक यात्री से सीधे मनमाने किराए की डील कर रहे हैं। ऐसे में मीटर व्यवस्था लागू करना परिवहन विभाग के लिए चुनौती होगा। एक माह की अस्थायी फिटनेस शहर में सिर्फ इलेक्ट्रिक ऑटो संचालन के पुराने आदेश में सरकार ने दो संशोधन किए हैं। अब शहर में इलेक्ट्रिक के साथ एलपीजी व पेट्रोल ऑटो भी दौड़ सकेंगे। पुराने पेट्रोल ऑटो को किराया मीटर के लिए एक माह का अस्थायी फिटनेस दिया जाएगा। इस बीच परिवहन विभाग ऑटो का प्रति किमी किराया निर्धारित कर देगा।

शहर को प्रदूषणमुक्त करने की पहली कसरत के तहत सरकार ने देहरादून में डीजल ऑटो का पंजीकरण बंद कर दिया है। अब सिर्फ पेट्रोल, एलपीजी और इलेक्ट्रिक ऑटो ही पंजीकृत किए जाएंगे। ऑटो संचालकों की किराए में लूट-खसोट बंद करने को ऑटो में किराया मीटर लगाना भी अनिवार्य किया गया …

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