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68 गणतंत्र दिवस पर इतिहास खुद को दोहराएगा

हालांकि इस बार सिर्फ इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ही मुख्य अतिथि नहीं होंगे। भारत ने आसियान के नौ अन्य राष्ट्राध्यक्षों को भी इस ऐतिहासिक पल के लिए आमंत्रित किया है जो गणतंत्र दिवस की परेड में भारत की सैन्य क्षमता और सांस्कृतिक विविधता के गवाह बनेंगे। बता दें, पीएम मोदी की सरकार ने अपनी एक्ट ईस्ट पॉलिसी का प्रदर्शन करने के उद्देश्य से दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान के 10 देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया है जो अपने आप में अप्रत्याशित है। 68 गणतंत्र दिवस पर इतिहास खुद को दोहराएगा

भारत ने इससे पहले कभी भी गणतंत्र दिवस के लिए दो अतिथियों से ज्यादा को नहीं बुलाया था। हाल ही में अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा था कि 26 जनवरी 2018 को विशेष रूप से आने वाले समय में याद किया जाएगा। मुख्य अतिथियों की ज्यादा संख्या को देखते हुए राजपथ पर वीआईपी स्टैंड को चौड़ा किया गया है। 

 इस बार गणतंत्र दिवस की परेड में म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विदोदो, सिंगापुर के पीएम ली सीन लूंग, मलेशिया के पीएम नजीब रजक, थाईलैंड के पीएम प्रयुत चान ओ चा, वियतनाम के पीएम गुयेन जुआन फक, फिलीपींस के रॉड्रिगो डूटर्ट, कंबोडिया के पीएम हुन सेन, लाओस के पीएम थोनगलोउन सिसोउलिथ और ब्रुनई के सुलतान हसनल बोल्किया हिस्सा लेंगे। 

बता दें, सभी 10 नेता 25 जनवरी को इंडिया आसियान कमेमरेटिव समिट में भी हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन आपसी साझेदारी के 25 साल पूरे होने और समिट लेवल बातचीत के 15 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। पीएम मोदी कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन से अलग बातचीत करेंगे। कंबोडिया के पीएम भारत की राजकीय यात्रा के लिए 27 जनवरी तक यहां रुकेंगे। गौरतलब है कि आसियान में इंडोनेशिया, सिंगापुर, फिलीपींस, मलयेशिया, ब्रुनेई, थाइलैंड, कंबोडिया, लाओस, म्यांमार और वियतनाम शामिल हैं। 

 
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