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ग्लोबल वार्मिंग के कारण 20 वर्षों में पड़ेगी भयंकर बाढ़ की मार

वर्तमान में ग्लोबल वार्मिंग दुनिया के सबसे बड़े संकटों में से एक बन चुकी है। इसके वर्तमान और आगामी दुष्परिणामों के बारे में वैज्ञानिक और शोधकर्ता निरंतर आगाह कर रहे हैं और इससे बचने के लिए उचित कदम उठाने की सलाह भी दे रहे हैं। इसी कड़ी में एक और अध्ययन सामने आया है, जिसमें एक भयानक स्थिति के पैदा होने की चेतावनी दी गई है।ग्लोबल वार्मिंग के कारण 20 वर्षों में पड़ेगी भयंकर बाढ़ की मार

शोधकर्ताओं का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग जिस तरह से अपना असर दिखा रही है उस हिसाब से आगामी 20 वर्षों में अमेरिका के अधिकतर हिस्सों के अलावा भारत, अफ्रीका और मध्य यूरोप के कई इलाके भयंकर बाढ़ की चपेट में होंगे। इससे बड़े स्तर पर जनजीवन प्रभावित होगा और आर्थिक व सामाजिक संकट पैदा हो जाएंगे।

 शोधकर्ताओं के मुताबिक, ग्लोबल वार्मिंग के कई दुष्परिणामों का सामना हम आज भी कर रहे हैं। उनमें से एक नदियों में बाढ़ है। यह नवीन अध्ययन इस आपदा के व्यापक स्तर को जानने के लिए जर्मनी स्थित पोट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च (पीआइके) के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है। इसमें चेतावनी दी
गई है कि वर्ष 2040 तक नदियों में उफान बढ़ता जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप कई शहर और इलाकेबाढ़ की चपेट में होंगे

सुरक्षा स्तर बढ़ाने की जरूरत 

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि बाढ़ के कारण दुनियाभर के लाखों लोग संक्रमण की चपेट में होंगे। सांइस एडवांसेस नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, इस अध्ययन के प्रमुख लेखक और पीआइके में शोधकर्ता स्वेन विलनर का कहना है कि आगामी दो दशकों में आने वाले इस भयंकर संकट से यदि बचना है तो अमेरिका को कम से कम अपने सुरक्षा स्तर को दोगुना करने की जरूरत है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव यहीं पड़ने वाला है। इसलिए बेहतर यही होगा कि इसके लिए उपयुक्त कदम अभी से उठाए जाने शुरू कर दिए जाएं।

ये कदम उठाए जाने की दी सलाह 

शोधकर्ताओं ने कुछ जरूरी कदमों को उठाने की सलाह भी दी है। इसके तहत नदी प्रबंधन में सुधार, भवन निर्माण के मानकों को सख्त करना, खतरे वाले स्थानों से बस्तियों के स्थानांतरण की व्यवस्था आदि ऐसे कदम हैं, जिससे इस आपदा के असर को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

इतने लोग होंगे प्रभावित 

शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि, उत्तरी अमेरिका में बाढ़ से प्रभावित होने वालों की संख्या में 10 लाख तक का इजाफा हो सकता है। पहली नजर में यह आंकड़ा बहुत बड़ा नहीं लगता है, लेकिन इस संख्या के 10 गुना तक बढ़ने की आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा दक्षिण अमेरिका में 60 लाख से 1.2 करोड़ लोग, अफ्रीका में ढाई करोड़ से साढ़े तीन करोड़ और एशिया में सात करोड़ से 15 करोड़ के करीब लोग इससे प्रभावित होंगे। हालांकि ये केवल शुरुआती अनुमान हैं। इन आंकड़ों के और विशाल होने की भी आशंका है।

विभिन्न स्रोतों से जुटाए गए तथ्यों का कंप्यूटर द्वारा विश्लेषण करने के बाद शोधकर्ताओं ने उपरोक्त आंकड़े जारी किए हैं। विलनर के मुताबिक, इन आंकड़ों के पूरी तरह सटीक होने की पुष्टि नहीं की जा सकती। यह मोटा-मोटा अनुमान है। संकट इससे कई ज्यादा बड़ा या इससे कुछ कम भी रह सकता है।

यहां पड़ेगा प्रभाव
शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि इसका सबसे ज्यादा असर अमेरिका पर पड़ेगा। इसके अलावा भारत, अफ्रीका, इंडोनेशिया और मध्य यूरोप के बड़े इलाके भी इससे प्रभावित होंगे। इसलिए इन इलाकों को अनुकूलन की आवश्यकता है। 

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