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लखनऊ के इस कुलपति को लेकर हुआ बड़ा खुलासा, जन्मतिथि से लेकर नियुक्ति तक गलत

डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. निशीथ राय पर शासन द्वारा कराई गई जांच में गंभीर अनियमितता पाई गई हैं। उनकी जन्मतिथि से लेकर नियुक्ति और उनकी ओर से की गई नियुक्तियां कटघरे में आ गई हैं। मंगलवार को विश्वविद्यालय की सामान्य परिषद की बैठक में यह रिपोर्ट रखी जानी थी लेकिन अचानक बैठक स्थगित हो गई।

हालांकि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हो गई। इसकी वजह से एक बार फिर कुलपति को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। शासन की ओर से कराई गई जांच में कहा गया है कि प्रो. राय एक साथ लविवि स्थित क्षेत्रीय नगर एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र के निदेशक और पुनर्वास विवि के कुलपति के रूप में एक साथ काम करते रहे। जबकि उन्हें निदेशक के पद से त्याग पत्र दे देना चाहिए था। यह अनियमितता और नियम विरुद्ध है। इसी क्रम में उनकी लविवि से पांच साल की असाधारण अवकाश भी स्वीकृत नहीं है।

जांच रिपोर्ट : जन्मतिथि में हेरफेर 
प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि कुलपति के रूप में प्रो. राय की नियुक्ति भी संदेह के घेरे में है। इसमें उन्होंने जो जन्मतिथि बताई और जो वास्तविक है, उनमें अंतर है। इस मामले में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति, अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा, डीएम, सचिव पुनर्वास विश्वविद्यालय से रिपोर्ट मांगी गई। कुलसचिव पुनर्वास विश्वविद्यालय ने बताया कि डॉ. राय की जन्मतिथि से संबंधित दस्तावेज विवि में उपलब्ध नहीं हैं। प्रथमदृष्टया पाया गया कि जन्मतिथि में गड़बड़ी कर नियुक्ति पाई गई। 

ऑडिट रिपोर्ट में भी खुला फर्जीवाड़ा
भारत सरकार की ओर से कराई गई एक जांच में प्रो. राय पर निदेशक क्षेत्रीय नगर एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र से जुड़े मामले में ऑडिट टीम से रेग्युलर ऑडिट कराई गई। ऑडिट रिपोर्ट में भी फर्जीवाड़ा किए जाने की पुष्टि हुई है। कुलसचिव लखनऊ विश्वविद्यालय की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि सेंटर के इंदिरा नगर परिसर के निर्माण के लिए राशि जारी की गई लेकिन भवन निर्माण अधूरा है।

मनमाने तरीके से कीं नियुक्तियां
प्रो. निशीथ राय की ओर से यहां मनमाने तरीके से 33 नियुक्तियां की गई हैं। प्रमुख सचिव दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से की गई एक अन्य जांच में कहा गया है कि विश्वविद्यालय द्वारा भर्ती के लिए विज्ञापित पदों के सापेक्ष विज्ञापन में आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं है। शिक्षक भर्ती में दो पदों पर की गई नियुक्ति में अनियमितता की गई है। सहायक कुलसचिव के पद पर भर्ती के विज्ञापन में पदों की अर्हता में अनियमित तरीके से बदलाव किया गया है।

रिपोर्ट में यह भी 
विभिन्न शिकायतों की जांच के लिए गठित प्रमुख सचिव वन रेणुका कुमार की अध्यक्षता वाली एक अन्य कमेटी की जांच में विश्वविद्यालय स्टाफ में दिव्यांगों के प्रति संवेदनहीनता, परिसर में स्वास्थ्य सेवा का अभाव, मेस में घटिया खाना, परिसर में शटल बस सेवा का अभाव, शिक्षकों की वरिष्ठता सूची न बनना, परिसर में भय का माहौल की भी बातें कही गई हैं। विभिन्न जांच कमेटियों की रिपोर्ट के आधार पर तैयार रिपोर्ट में कुलपति को लेकर संस्तुतियां भी की हैं।

सामान्य परिषद की बैठक अपरिहार्य कारणों से स्थगित की गई है। जांच के बारे में फिलहाल कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं हूं। 

सारे आरोप बेबुनियाद हैं। इन्हें हाईकोर्ट भी खारिज कर चुका है। बिना मेरा पक्ष लिए रिपोर्ट बनाई गई है। ऑडिट आपत्ति 2011-12 की है, जिसे निस्तारित किया जा चुका है। स्कूल में जन्मतिथि गलत लिख गई थी जिसे ठीक करवाया है। मेरी जन्म 1963 में हुआ, मैंने सभी जगह इसे ही लिखा है। निदेशक की मेरी नियुक्ति नियमित है और तत्कालीन कुलपति प्रो. एसबी निमसे से वीसी के रूप में काम करने की अनुमति मिली है। नियुक्तियों में गड़बड़ी की जांच राज्यपाल द्वारा कराई जा चुकी है, उसमें भी कुछ नहीं मिला है।

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