पढ़े और देखें… ये रूह कंपा देने वाले मोटापे की कहानी: विडियो

न तो वो ट्रेन से सफर कर सकता था और न ही हवाई यात्रा. बैठते ही सो जाना और फिर खर्राटों की ऐसी गूंज जो दूसरे यात्रियों के लिए बन जाती थी परेशानी का सबब. उसका शरीर भले ही सो जाता था, लेकिन दिमाग इस कदर जाग जाता था कि देखने वालों की रूह कांप जाती थी. 6 घंटे की नींद में 453 बार दिमाग जाग जाता था और एक मिनट 10 सेकंड तक के लिए तो सांसें भी थम जाती थीं. यह कोई कहानी नहीं बल्कि हकीकत है, उस शख्स की जो मोटापे की वजह से स्लीप एप्निया का  इस कदर शिकार हो चुका था कि उसकी जिंदगी ही नर्क बन गई थी.पढ़े और देखें… ये रूह कंपा देने वाले मोटापे की कहानी: विडियो

रूह कंपा देने वाली ये कहानी है धनबाद में रहने वाले कोल मर्चेन्ट मुकेश कुमार की. मुकेश कुमार की उम्र करीब 40 साल है. बीते साढ़े चार साल से वह अपने मोटापे औऱ स्लीप एप्निया की वजह से विकलांगों की तरह जिंदगी जी रहे थे. बड़ी मेहनत से खुद अपने पैरों पर खड़े होने के बाद उन्होंने अपने कारोबार को जमाया है. मुकेश को साल 2013 के बाद मोटापे ने इस तरह जकड़ा कि उसका सीधा असर धंधे पर दिखने लगा. उनका वजन 131 किलो हो गया. मुकेश कुमार मोटापे की वजह से स्लीप एप्निया से ग्रस्त हो गए. चौबीसों घंटों नींद जैसा लगना, आलस आना, बैठे-बैठे सो जाना, नींद से जाग जाना, नींद में ऑक्सीजन का रुक जाना, सिर में दर्द रहना, भयकंर खर्राटे लेना जैसे और कई लक्षणों से वह जिंदगी से तंग हो चुके थे.

हालात यहां तक बिगड़ गए कि ट्रेन में बाकी मुसाफिरों के साथ उनके लिए सोना तक दुश्वार हो गया. ट्रेन में सफर के दौरान पूरी बोगी के मुसाफिरों की शामत आ जाती. खर्राटों की आवाज बाकी लोगों के लिए बर्दाश्त से बाहर हो जाती थी. इस परेशानी के चलते एक हजार किलोमीटर तक का सफर ट्रेन को छोड़ कार से करना मजबूरी बन गया था. धनबाद से दिल्ली तक कई नामी-गिरामी डॉक्टरों को दिखाया. स्लीप स्टडी की तो पता चला कि 6 घंटे 10 मिनट की नींद के दौरान ऑक्सीजन की कमी के कारण 453 बार दिमाग जाग जाता है और ऊंची आवाज वाले 3500 खर्राटे आते हैं. नींद में 1 मिनट 10 सेकंड तक सांस रुकने लगी थी. डॉक्टरों की सलाह पर सोते वक्त सीपअप मशीन (ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाली मशीन) लगाई गई, लेकिन दो साल बात उससे भी बात नही बनी. पूरा घर उनकी बीमारी से परेशान हो चुका था. घर में पत्नी औऱ दो बच्चे खर्राटे सुनने के आदी हो चुके थे.

मोटापे की वजह से उनके पैरों औऱ कमर मे दर्द होने लगा था. कारोबार को अपग्रेड करने में 90 फिसदी की गिरावट आ गई. ब्रांडेड कपड़े पहनने के शौकीन मुकेश कुमार को कपड़े के शो रूम से भी निराशा हाथ लगने लगी थी. उनकी साइज 48 हो चुकी थी, जबकि आमतौर पर 44 से बड़ा साइज नहीं मिलता था. पूरे दिन तीखा मिर्च-मसाला वाला खाना खाने का मन करता था. मुकेश बोझ बन चुकी जिंदगी को जैसे-तैसे काट रहे थे. मगर नींद में सांस रुक जाने की बीमारी ने उन्हें ऊपर से नीचे तक झकझोर के रख दिया. ये कोई साधारण बीमारी नहीं थी. आनन-फानन में डॉक्टर से परामर्श लिया. पूरी जांच करने के बाद डॉक्टर ने साफ कह दिया कि या तो वो सांस की नली के ऊपर जमी हुई चर्बी को ऑपरेशन करवाकर उसे निकलवा दें, या फिर 6 महीने में वजन कम कर लें, वरना उनके शरीर का कोई अंग डैमेज हो जाएगा. डॉक्टर की कही यह बात वाकई डराने वाली थी. तब मुकेश कुमार ने खुद ही बेरियाट्रिक सर्जरी के बारे में पता करना शुरू कर दिया.

   बेरियाट्रिक सर्जरी के लिए उन्होंने तमाम जांच पड़ताल के बाद मोहक हास्प‍िटल इंदौर को चुना. घर से बगैर किसी को बताए चुपचाप अपने दोस्त के साथ मुकेश इंदौर चले आए. डॉ मोहित भंडारी ने उनके हर सवाल का जवाब दिया. उन्हें भरोसा जगा और सीधे सर्जरी के लिए राजी हो गए. 25 मई 2017 को सर्जरी से एक घंटे पहले उन्होंने घर वालों को फोन कर बताया. सर्जरी से तीन दिन बाद जो रात आई वह उनके लिए जन्नत जैसी खुशियां लेकर आई. साढ़े चार साल बाद उन्होंने चैन की नींद ली. आज महज 4 महीने में उन्होंने सर्जरी से 33 किलो वजन घटा लिया. अब उनका वजन 98 किलो है औऱ वजन का गिरना लगातार जारी है. अब उनका कारोबार दिन दूनी-रात चौगुनी तरक्की कर रहा है और ऐसा लग रहा है मानो उन्हें दुसरा जन्म मिला हो. उनका कहना है कि बेरियाट्रिक सर्जरी के लिये मोहक हास्प‍िटल देश का सबसे भरोसेमंद अस्पताल साबित हो चुका है.

मुकेश कुमार की पूरी कहानी नीचे दिए वीडियो में आप देख सकते हैं.

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