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मुंबई हमलों के आरोपियों को सजा नहीं देना चाहता पाकिस्तान

मुंबई हमलों के नौ साल बाद भी पाकिस्तान इस मामले में न्याय को लेकर पीछे हट रहा है। पूरी दुनिया को हिला देने वाले इस हमले में 10 आतंकवादियों ने 166 लोगों को मार डाला था। मगर आज तक एक भी संदिग्ध को इस मामले में सजा नहीं मिल सकी है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि पाकिस्तान के लिए यह मामला कभी प्रमुखता में नहीं रहा।
खासतौर से मुंबई हमलों के मुख्य साजिशकर्ता हाफिज सईद की रिहाई को लेकर पाकिस्तान के रवैये के बाद तो यह शंका और भी ज्यादा स्पष्ट हो गई है। नवंबर 2008 में जब लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी कराची से समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचे और 166 लोगों को मार डाला। हमले में करीब 300 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। मुंबई हमलों को लेकर पाकिस्तान की इस्लामाबाद स्थित आतंकवाद निरोधक कोर्ट में (एटीसी) सुनवाई चल रही है।

इस कोर्ट में मुंबई हमले के अलावा शायद ही कोई अन्य मामला हो जिसकी सुनवाई आठ साल बाद भी चल रही हो। एक वरिष्ठ अधिवक्ता के अनुसार एटीसी में सुनवाई का मतलब है केस पर तेजी से फैसला आना मगर इस मामले में एटीसी किसी अन्य समान्य कोर्ट की तरह कार्रवाई कर रही है जहां सालों तक मामले लटके रहते हैं। यह दिखाता है कि सरकार को इस मामले के जल्द सुनवाई या फैसले में कोई रुचि नहीं है।

 अधिवक्ता के अनुसार यह मामला सालो पहले तय हो गया होता अगर यह भारत से जुड़ा हुआ ना होता। पाकिस्तान अदालत और संवैधानिक कर्तव्य की दुहाई देकर हाफिज सईद की रिहाई को न्यायसंगत ठहराने का प्रयास कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता मोबीन अहमद काजी ने बताया कि एटीसी में यह मामला काफी पहले तय हो जाना चाहिए था। 

उन्होंने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि पाकिस्तान इस आपराधिक मामले की सुनवाई को लेकर इतना लंबा वक्त क्यों ले रहा है क्योंकि आठ साल का वक्त बहुत ज्यादा होता है और इतने समय में सबूत भी नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारत इस मामले में ठोस सबूत उपलब्ध नहीं कराता है तो संदिग्धों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर देना चाहिए। कहा, कि ऐसा लगता है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय दबावों के चलते मामले को लटकाए हुए है ताकि वह संदिग्धों को बिना सबूतों के भी जेल में रख सके।

सईद की रिहाई से बड़ा उसके समर्थकों का मनोबल
सईद के समर्थक मानते है कि उसकी रिहाई से इस मामले में जेल में बंद छह अन्य संदिग्धों का भी मनोबल बढ़ गया है। एक सईद समर्थक के अनुसार इस मामले में जेल में बंद संदिग्ध अब्दुल वाजिद, मजहर इकबाल, हमद अमीन सादिक, साहिद जमील रियाज, जामिल अहमद और यूनुस अंजुम को भरोसा है कि उनके नेता सईद की रिहाई के बाद अब उनकी रिहाई का भी रास्ता खुल गया है। ये सभी मुंबई हमलों को लेकर हत्या, योजना बनाने और मुंबई हमलों को लेकर सुनवाई का सामना कर रहे हैं।

 इन सभी को रावलपिंडी की अदियाला जेल में रखा गया है। मामले में सातवां संदिग्ध एलईटी का ऑपरेशन कमांडर जकीउर रहमान लखवी को उसके जमानत हासिल करने के दो साल जेल से रिहाई मिली जिसके बाद से वह किसी गोपनीय जगह पर रह रहा है। इस तरह की खबरें भी है कि लखवी सईद की रिहाई के बाद लाहौर स्थित जमात-उद-दावा के मुख्यालय में पहुंचा था। 

एक अन्य संदिग्ध आतंकी सूफियान जफर भी है जिसे पिछले साल मुंबई हमलों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। भारत ने पाकिस्तान  मांग की है कि वह सईद को तुरंत गिरफ्तार करे और सजा दे। सईद के मुंबई हमलों में हाथ को लेकर भारत ने एक डोजियर भी पाकिस्तान को सौंपा है। 

पाकिस्तान कोर्ट के मुख्य अभियोजन ने बताया कि मामले में पाकिस्तान कोर्ट में 70 से ज्यादा पाकिस्तानियों की गवाही हो चुकी है अब भारत की बारी है कि वह केस में जल्द फैसले के लिए अपने 24 गवाहों को भेजे। प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद के सिर पर अमेरिका ने दस लाख डॉलर का इनाम रखा गया है।  जमात-उद-दावा ही मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार है। 

 
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