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कर्नाटक के गृह मंत्री बोले, कुछ हफ्ते में पकड़ लिए जाएंगे गौरी लंकेश के हत्यारे

बेंगलुरु, पीटीआई। वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश के हत्यारों को कुछ हफ्तों में पकड़ लिया जाएगा। हत्यारों ने दो माह पहले अचानक हमला कर पत्रकार की हत्या कर दी थी। यह जानकारी कर्नाटक के गृह मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने दी है। उन्‍होंने कहा कि विशेष जांच टीम (एसआइटी) हत्या मामले की जांच में जुटी हुई है। जांच टीम को हत्यारों के बारे में सुराग हाथ लगे हैं, लेकिन इसके बारे में अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।कर्नाटक के गृह मंत्री बोले, कुछ हफ्ते में पकड़ लिए जाएंगे गौरी लंकेश के हत्यारे

गृह मंत्री ने कहा, ‘किसने हत्या की मैं इस बारे में जान गया हूं। धन्यवाद एसआइटी को जिसने जानकारी मुहैया कराई है। लेकिन मैं अभी इसे जाहिर नहीं कर सकता।’ प्रेस क्लब बेंगलुरु की ओर से आयोजित प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘गौरी के हत्यारे कुछ हफ्तों में 100 फीसद पकड़े जाएंगे।’

रामलिंगा रेड्डी पहले भी कर चुके हैं दावा

इससे पहले दो अक्‍टूबर को रामलिंगा रेड्डी ने दावा किया था कि वरिष्ठ कन्नड़ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को कुछ सुराग मिले हैं और वह साक्ष्य जुटाने में जुटी हुई है। रेड्डी ने कहा, ‘हमें सुराग मिले हैं, लेकिन अभी हम मीडिया को कुछ नहीं बता सकते क्योंकि हमें जो सुराग मिले हैं। उनके लिए साक्ष्य जुटाने की जरूरत है।’ उन्होंने कहा कि जब उपयुक्त साक्ष्य नहीं रहेगा तो हम अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर भी दें तो यह नहीं टिक पाएगा। इसलिए हम ठोस साक्ष्य जुटाने की कोशिश कर रहे हैं. हमारी एसआइटी साक्ष्य जुटाने के लिए काम कर रही है।

कर्नाटक के गृह मंत्री ने इस मामले में कुछ सुराग जुटाने के बारे में नौ सितंबर को भी इसी तरह का दावा किया था। उन्होंने दोषियों को जल्द पकड़ने की आशा जताई थी। कर्नाटक सरकार ने आईजीपी (खुफिया) बीके सिंह के नेतृत्व में एक एसआईटी गठित की थी। राज्य सरकार ने गौरी की हत्या से जुड़ा सुराग देने वाले व्यक्ति को 10 लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा की थी।

गोली मारकर कर दी गई थी हत्‍या

गौरतलब है कि छह सितंबर को वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की बेंगलुरू में गोली मारकर हत्या कर दी गई। राज राजेश्वरी इलाके में उनके आवास के प्रवेश द्वार पर अज्ञात हमलावरों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। लंकेश कन्नड़ टैबलॉयड ‘गौरी लंकेश पत्रिका’ का संपादन करती थीं। इसके अलावा कुछ दूसरे प्रकाशन की भी मालकिन थीं। लंकेश ने अपने जीवन पर खतरा बताया था।

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