Saturday , October 1 2022

करियर के बीच फंसे लोग मां-बाप बनने की चिंता को लेकर उठा रहे ये बड़ा कदम

बेंगलुर में एक निजी कंपनी में बतौर सीईओ काम कर रही 31 साल की एक युवती को मां बनने की फिक्र तो है, लेकिन पहले करियर बनाना है। इसी वजह से अभी तक शादी नहीं की है। देर से शादी के बाद गर्भधारण में दिक्कत हो सकती है। संतानहीनता की भी आशंका है। लिहाजा, उसने पहले से ही अपने अंडाणु निकलवाकर इंदौर के एक आईवीएफ सेंटर के बैंक में सुरक्षित रखवा दिए हैं।

यह कोई इकलौता मामला नहीं है। कई पेशेवर युवा स्पर्म और अंडाणु सहेज कर रख रहे हैं, ताकि उम्र अधिक होने से माता-पिता बनने में दिक्कत न आए। देशभर में करीब ढाई हजार आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) सेंटर हैं। उनमें से करीब 2 हजार स्पर्म और अंडे को सुरक्षित रखने के लिए बैंक का काम भी कर रहे हैं। इंडियन सोसायटी फॉर असिस्टेड रिप्रोडक्शन (आईएसएआर) के चेयरपर्सन वीरेंद्र वी शाह ने ‘नईदुनिया’ से चर्चा में बताया कि उनके सेंटर में अब तक करीब 28 युवा स्पर्म और अंडाणु सुरक्षित रख चुके हैं। ये आंकड़े पिछले 3 साल के हैं।स्पर्म व अंडाणु सुरक्षित रखवाने वालों में मॉडलिंग करने वाले युवा भी हैं, जो फिलहाल शादी नहीं करना चाहते।

भ्रूण बैंकिंग भी की जा रही

इसी तरह से भ्रूण (एंब्रियो) बैंकिंग भी की जा रही है। एंब्रियो बैंकिंग वे दंपती करा रहे हैं, जिन्हें संतान नहीं हैं। ऐसे में आईवीएफ तकनीक से एक से ज्यादा भ्रूण तैयार किए जाते हैं। एक भ्रूण या दो भ्रूण महिला के गर्भ में रख दिए जाते हैं। बाकी बैंक में सुरक्षित रखे जाते हैं। पहले भ्रूण से संतान नहीं होने पर बैंक में रखे भ्रूण का उपयोग किया जाता है। इससे प्रक्रिया और खर्च दोनों कम हो जाता है। भ्रूण को तीन साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

कैंसर मरीज मजबूरी में करा रहे बैंकिंग 

डॉ. वीरेंद्र के मुताबिक उनके पास ऐसे कैंसर मरीजों के भी स्पर्म व अंडे सुरक्षित रखे हैं, जिनकी कीमोथैरेपी होने वाली है। कीमो के बाद पुरुषाें के टेस्टिस में असर होने से स्पर्म व महिलाओं के अंडाशय में अंडाणु बनना बंद हो सकते हैं। एमएनसी में काम करने वाले या मॉडल ज्यादा इंडियन फर्टिलिटी सोसायटी के सेक्रेटरी जनरल डॉ. केजी नायर के मुताबिक दिल्ली स्थित उनके बैंक में हर साल दो-तीन युवतियां अंडाणु सुरक्षित रख रही हैं। इनमें ज्यादातर मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने वाली हैं। मॉडल्स भी इसमें शामिल हैं। हालांकि स्पर्म बैंकिंग के लिए वही पुरुष आ रहे हैं, जिन्हें कैंसर है। 

इतना आता है खर्च 

स्पर्म बैकिंग-10 हजार रुपए प्रति साल। अधिकतम 25 साल तक रख सकते हैं।

एग (अंडाणु) बैंकिंग- 3 साल के लिए डेढ़ लाख रुपए। बाद में हर महीने 1-2 हजार रुपए। 25 साल तक रख सकते हैं। इस तकनीक को विक्ट्रीफिकेशन कहा जाता है।

स्टोरेज- शून्य से 198 डिग्री नीचे के तापमान पर रखे जाते हैं।

केस स्टडी- नेवी में काम करने वाले एक युवक को छह महीने या साल भर में एक बार छुट्टी मिलती है। लिहाजा उन्होंने स्पर्म एक बैंक में सुरक्षित रखा है। इसका मकसद यह है कि गर्भधारण का उचित समय आने पर डॉक्टर उसके स्पर्म से आईवीएफ तकनीक से भू्रण को उसकी पत्नी के गर्भ में स्थापित कर सकेंगे।

Loading...