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जीएसटी काउंसिल की 23वीं बैठक शुरू, सस्ती हो सकती है 160 वस्तुएं

नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल की 23वीं बैठक गुवाहाटी में शुरू हो चुकी है। इस अहम बैठक में काउंसिल करीब 160 वस्तुओं पर कर की दरें कम करने पर फैसला ले सकती है। इस बैठक में रोजाना के इस्तेमाल वाली वस्तुओं, प्लास्टिक उत्पादों और हाथ से बनने वाले फर्नीचर को 28 फीसद की उच्चतम दर से बाहर किया जा सकता है। जीएसटी काउंसिल में सभी राज्यों के वित्त मंत्री शामिल हैं। साथ ही काउंसिल इस बैठक में व्यवसायों के लिए रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कर अनुपालन नियमों को और सरल कर सकती है। गौरतलब है कि 1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद से ही जीएसटी काउंसिल हर महीने बैठक कर रही है।

जीएसटी काउंसिल की 23वीं बैठक शुरू, सस्ती हो सकती है 160 वस्तुएं

फिलहाल 28 फीसद में क्या कुछ

फिलहाल 227 वस्तुओं पर 28 फीसद जीएसटी लगता है। इनमें से पान मसाला, सीमेंट, मेकअप सामान, कॉस्मेटिक्स, वैक्यूम क्लीनर, चार्टर्ड विमान, वॉशिंग मशीन और रेफ्रिजरेटर जैसी 62 चीजों को छोड़कर बाकी 165 वस्तुओं पर इस दर को घटाकर 18 फीसद किया जा सकता है। जिन चीजों पर जीएसटी की दर कम होने के आसार हैं, उनमें पंखे, डिटरजेंट, शैम्पू, एलपीजी स्टोव, फर्नीचर जैसे उत्पाद शामिल हैं। इससे मध्य वर्ग को राहत मिलेगी।

इस बैठक में क्या कुछ संभव

जीएसटीएन में आ रही खामियों को दुरुस्त करना

आज की बैठक में जीएसटीएन के विषय पर चर्चा संभव है। हालांकि हाल ही में जीएसटीएन के सीईओ प्रकाश राव ने बताया है कि हम इसे लगातार मजबूत बना रहे हैं और इसकी खामियों को दूर किया गया है। उनका कहना है कि जीएसटी के लिए तकनीकी ढांचा तैयार करने वाली कंपनी ने टैक्स फाइल करने की व्यवस्था को और मजबूत बनाया है जो कि आखिरी समय में आने वाली भारी भीड़ को संभालने में सक्षम है।

डिजिटल पेमेंट को और सरल बनाने पर विचार

आज की बैठक में सरकार का तीसरा एजेंडा यह है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन को और बढ़ावा देना रह सकता है। इस पर काउंसिल विचार करेगी कि क्या किया जा सकता है। काउंसिल विक्रेता और ग्राहकों के बीच इसे प्रोत्साहित करने के लिए इस पर कुछ अहम फैसले ले सकती है। स्टेट जीएसटी के तहत क्रेडिट और छूट में कुछ राहत संभव है। जैसे कि विक्रेता को डिजिटल पेमेंट की मदद से कुछ क्रेडिट मिलेगा जिसे उसकी जीसएटी लायबिटीलि के हिसाब से एडजस्ट किया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर जब ग्राहक डिजिटल पेमेंट करेंगे तो उन्हें टैक्स के रूप में कम भुगतान करना होगा।

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