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बड़ीखबर: ‘बजट’ को लेकर PM मोदी ने की विशेष पहल, अब होंगे दूर ये भ्रम…

नई दिल्ली ।  देश को आम बजट -2018 का बेसब्री से इंतजार है। लोगों की सरकार से अपेक्षा है कि आगामी बजट उनकी उम्मीदों पर खरा उतरेगा।पीएम मोदी ने संकेत दिया है कि आम लोग बजट-2018 से नाउम्मीद नहीं होंगे। लेकिन लोकलुभावन घोषणाओं को जगह नहीं मिलेगी। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि यह मुद्दा वित्त मंत्री के अधिकार क्षेत्र में आता है और वह इसमें दखल नहीं देना चाहते हैं।

बजट से पहले पीएम के बोल

प्रधानमंत्री मोदी का बजट प्लान

पीएम पहले ही साफ कर चुके हैं कि सरकार की प्राथमिकता में कृषि विकास और युवाओं को रोजगार पहले से ही है। लेकिन जिस अंदाज में विपक्षी दल जनता को दिग्भ्रमित करने की कोशिश कर रही है, उस भ्रम को तोड़ने की आवश्यकता है। जनता को ये बताने की जरूरत है कि सरकार ने उनके फायदे के लिए क्या क्या किया है। सरकारी योजनाओं और नीतियों को व्यापक तौर आम लोगों तक ले जाने की जरूरत है। पीएम ने इस सिलसिले में कुछ अलह फैसले भी किए हैं। उदाहरण के तौर पर बजट पेश किए जाने के बाद वित्त मंत्री और वित्त विभाग के बड़े अधिकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों के जवाब देते थे। लेकिन इस दफा नजारा कुछ और रहेगा।

बजट पेश होने के बाद आर्थिक सलाहकार परिषद के सभी सदस्य एक साथ दूरदर्शन पर लोगों से मुखातिब होंगे और बजट के हर पहलू को विस्तार से बताएंगे। पीएम मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सभी सदस्य पहली बार आम लोगों की बजट की बारिकियों, भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश करेंगे।

अहम है पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद

नीति आयोग के सदस्य डा. बिबेक देबराय की अध्यक्षता वाली आर्थिक परिषद प्रधानमंत्री को विभिन्न आर्थिक मामलों में सलाह देने के लिए बनायी गई थी। परिषद का काम प्रधानमंत्री द्वारा सौंपे गये आर्थिक या अन्य संबंधित मुद्दों पर विश्लेषण करना और उन्हें परामर्श देना है। इसके अलावा वृहद आर्थिक महत्व के मुद्दों का समाधान और उसके बारे में अपने विचार से प्रधानमंत्री को अवगत कराना होता है। परिषद इसके साथ ही प्रधानमंत्री द्वारा समय-समय पर दिये गये अन्य कार्यों को भी देखेगी। परिषद में देबराय के अलावा अंशकालिक सदस्य के रूप में डॉ. सुरजीत भल्ला, डॉ. रथिन रॉय और डॉ. आशिमा गोयल हैं। इसके अलावा नीति आयोग के सदस्य सचिव रतन वाटल परिषद के प्रधान सलाहकार हैं।

कब किया गया आर्थिक परिषद का गठन

आर्थिक परिषद का गठन ऐसे समय किया गया था जब वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर घटकर 5.7 प्रतिशत पर आ गई थी और वो तीन साल के न्यूनतम स्तर थी। इससे पहले भी लगातार छह तिमाहियों में आर्थिक वृद्धि दर में पहले के मुकाबले गिरावट रही है। इसके अलावा औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर भी जुलाई 2017 में घटकर 1.2 प्रतिशत पर आ गई थी जो जून में 5.4 प्रतिशत पर थी।

नोटबंदी और जीएसटी सरकार की बड़ी कामयाबीनोटबंदी को बहुत बड़ी सफलता बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ एक करेंसी नोट को दूसरे से बदलने का मामला नहीं था, बल्कि इस कदम से दुनियाभर में भारत, उसकी सरकार और रिजर्व बैंक का सम्मान बढ़ा है। वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) पर उन्होंने कहा कि सरकार इस ‘वन नेशन वन टैक्स’ सिस्टम की खामियों को दुरुस्त करने के लिए तैयार है। जीएसटी का विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे लोग संसद का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि 1961 में आयकर कानून आने के बाद से उसमें कितने बदलाव करने पड़े। इसी तरह जीएसटी भी नई प्रणाली है और लोगों को इसका अभ्यस्त होने में कुछ समय लगेगा।

रोजगार पर फैलाया जा रहा झूठ

विपक्ष के उन आरोपों को मोदी ने पूरी तरह खारिज कर दिया कि देश में रोजगारविहीन विकास हो रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि रोजगार सृजन को लेकर झूठ फैलाया जा रहा है।संगठित क्षेत्र में सिर्फ 10 फीसद रोजगार ही उपलब्ध हैं। शेष 90 फीसद रोजगार असंगठित क्षेत्र से जुड़े हैं और इस क्षेत्र से जुड़े आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।पिछले एक साल में 70 लाख नए रिटायरमेंट फंड या ईपीएफ अकाउंट खुले हैं। प्रधानमंत्री ने पूछा, क्या यह रोजगार सृजन को नहीं दर्शाते।

कृषि क्षेत्र में संकट

कृषि क्षेत्र में संकट पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आलोचना न्यायसंगत है और सरकार इससे इन्कार नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि यह केंद्र और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे किसानों की समस्याओं की पहचान करें और उनका समाधान करें। सरकार के बाकी बचे डेढ़ साल में किए जाने वाले कार्यो के बारे में पूछे जाने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि चार करोड़ परिवारों तक बिजली पहुंचाना और आमजन के लिए शुरू की गई योजनाओं के लाभ उन तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के उनके नारे का मतलब मुख्य विपक्षी पार्टी के खात्मे से नहीं था। इसका मतलब देश को कांग्रेसी संस्कृति से मुक्त करने का था। 

प्रधानमंत्री ने बजट पूर्व बहस को एक नया मोड़ देते हुए कहा कि यह सिर्फ एक मिथक है कि आम आदमी सरकार से मुफ्त की चीजों की आस रखता है।प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार सुधार के अपने एजेंडे पर चलती रहेगी क्योंकि इसी वजह से भारत दुनिया की ‘पांच सबसे दुर्बल’ अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी से बाहर आ सका है। इसके साथ ही पीएम ने कहा कि विरोधी दलों पूर्वाग्रह के साथ सरकार की नीतियों की आलोचना करते हैं। लेकिन उनकी सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। ये बात अलग है कि विपक्षी दल पर सरकार पर हमला करते हुए कहते हैं कि मौजूदा सरकार सभी मोर्चों पर नाकाम है, मसलन आर्थिक विकास रोजगार विहीन है, हर वर्ष करोड़ों युवाओं को रोजगार मुहैया कराने का दावा खोखला साबित हो चुका है। किसान अपनी बेबसी पर रो रहे हैं। खेतों तक पानी की सुविधा नहीं है, खेती की लागत बढ़ गई है। महंगाई की वजह से आम लोग हों या खास सभी परेशान हैं। आंकड़ों के साथ बाजीगरी कर ये सरकार देश की आर्थिक स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। लेकिन कुछ खास प्लान के जरिए पीएम मोदी विपक्ष की धार को कुंद करने में जुट गए हैं।

 
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