आतंकी घुसपैठ रोकने के लिए चीन ने बनाया ये प्लान, क्‍या भारत भी अपनाएगा…?

बीजिंग । हिंसा प्रभावित पश्चिमी प्रांत शिनजियांग में आतंकियों की घुसपैठ रोकने के लिए चीन एक दीवार बनाएगा। प्रांत के गवर्नर ने मंगलवार को कहा कि बाहरी आतंकियों को शिनजियांग में घुसने से रोकने के लिए सीमाओं पर दीवार खड़ी की जाएगी।

ज्ञात हो कि पिछले कुछ साल से उइगर मुस्लिम बहुल शिनजियांग आतंकी हिंसा की चपेट में है। तुर्की बोलने वाले उइगरों और हान समुदाय के लोगों के बीच हुई हिंसा में सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। चीन इसके लिए इस्लामिक आतंकियों और अलगाववादियों को जिम्मेदार ठहराता है। उसका कहना है कि इनमें से कई का देश के बाहर के आतंकी संगठनों से संबंध है। लेकिन मानवाधिकार समूह और निर्वासित उइगर इसे दमन की प्रतिक्रिया बताते हैं। उनके अनुसार, चीन उइगरों की संस्कृति और धर्म पर अंकुश लगा रहा है। चीन हालांकि इन आरोपों को खारिज करता रहता है।

सरकारी अखबार ‘चाइना डेली’ ने शिनजिंयाग के गवर्नर शोहरत जाकिर के हवाले से कहा है कि सीमा सुरक्षा के उपायों को मजबूत करने के लिए ‘ग्रेट वॉल’ का निर्माण किया जाएगा। हम अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ कोशिश करेंगे कि कोई ऐसी जगह नहीं बचे जहां से घुसपैठ हो सके। इसके अलावा सीमाई सड़कों और दूसरे ढांचों को भी दुरुस्त किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘पिछले साल कुल मिलाकर स्थिति स्थिर रही और लोगों ने सुरक्षित महसूस किया। हम अलगाववाद को वापसी का मौका नहीं देंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि धार्मिक अतिवाद और आतंकी हमले दोबारा देखने को नहीं मिले।’

चिनफिंग ने किया था ‘ग्रेट वॉल’ का जिक्रचीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पिछले साल संसद में दिए अपने सालाना संबोधन में ‘ग्रेट वॉल’ का जिक्र किया था। उन्होंने शिनजियांग के सांसदों से कहा था कि स्थिरता के लिए ‘लोहे की दीवार’ खड़ी करने की आवश्यकता है।

 उत्तरी सीमा में पहले से है एक दीवारचीन के विभिन्न शासकों ने बाहरी हमलावरों से रक्षा के लिए देश की उत्तरी सीमाओं पर किलेनुमा महान दीवार का निर्माण कराया था। इसे बनाने में पत्थर और मिट्टी का उपयोग किया गया था। इसके ज्यादातर हिस्से का निर्माण ईसा पूर्व सातवीं शताब्दी से पहले हुआ था।

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