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चन्द्रगुप्त तो मिट गए, लेकिन चाणक्य आज भी है : कुमार विश्‍वास

नई दिल्‍ली । अरविंद केजरीवाल और उनके करीबी रहे कुमार विश्‍वास के बीच की दूरी अब किसी से छिपी नहीं है। विश्‍वास को लेकर पार्टी में जिस तरह की बयानबाजी पिछले दिनों में देखने को मिली है उससे यह साफतौर पर जाहिर हो गया है कि उनकी पार्टी में कितनी जगह है। गाहे-बगाहे विश्‍वास ने इसको लेकर अपनी नारागजगी भी अपने अंदाज में जताई है। केजरीवाल पर उन्‍होंने अहमदनगर में एक बार फिर अपने व्‍यंग्य बाणों की वर्षा की है।

केजरीवाल पर तंज करते हुए कहा कि अन्ना आंदोलन से जुड़े सभी लोगों ने राजनीति में अपनी एक जगह बना ली है और अन्ना को भूल गए हैं। विश्वास ने उन्हें याद दिलाया कि पिछले पांच वषों में राजनीति में जितने भी चन्द्रगुप्त पैदा हुए हैं, उनकी जन्मस्थली रालेगांव सिद्धि है, लेकिन चंद्रगुप्तों को याद रखना चाहिए कि चन्द्रगुप्त तो मिट गए, लेकिन चाणक्य आज भी हैं। रालेगांव सिद्धि से उन्‍होंने अन्‍ना हजारे को याद किया जो इसी सप्‍ताह दिल्‍ली में दोबारा आंदोलन शुरू करने वाले हैं।

विश्वास का केजरीवाल पर निशाना
लाभ के पद में फंसे आप विधायकों से पार्टी में राजनीतिक संकट के बीच विश्वास ने महाराष्‍ट्र के अहमदनगर में आयोजित एक कवि सम्मेलन में कहा कि वह शनि भगवान को नमन करते हैं कि वह दुष्टों के सिर पर ऐसे ही तांडव करते रहें और सज्जनों को बचाते रहें। उन्होंने कहा कि मंच पर विराजमान लोगों का किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई वास्ता नहीं है और आप से कुमार विश्वास का कितना ताल्लुक है ये तो सभी जान ही गए हैं। उनके इस अंदाज को श्रोताओं ने खूब सराहा। कुमार ने यह भी साफ किया कि राजनीति उनके पैरों की जूती है और कविता सर की पगड़ी है। जब कई बार अहंकारी राजसत्ताएं आपकी इस पगड़ी पर हाथ डालने लगे, तो इस जूती को हाथ में उठाना पड़ता है। जो मंच पर होता है, वह सोचता है कि उसके पास ज्यादा अधिकार है, चाहे वो संत हो या आम आदमी या राजा ही सही, थोड़ा तो स्वाभिमान आ ही जाता है। सांसों की सीमा निश्चित है, इच्छाओं का अंत नहीं है, जिसकी कोई इच्छा न हो ऐसा कोई संत नहीं है। विश्वास ने रामायण की घटनाओं का वर्णन करते हुए कहा कि जिस राम के लिए हनुमान ने सारा जीवन दे दिया, जिस राम के लिए उनके पीछे-पीछे चल दिए, वहीं राम आज उनकी बात नहीं मान रहे हैं।

20 विधायकों को ले डूबा केजरीवाल का अहम
आम आदमी पार्टी (आप) के लालच ने दिल्ली को उपचुनाव की ओर ढकेल दिया है। आम आदमी पार्टी इस समय जिस रास्ते पर आकर खड़ी हो गई है इसके लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जिम्मेदार हैं। उनका अहम 20 विधायकों को ले डूबा है। केजरीवाल के कारण ही अब फिर से दिल्ली में उपचुनाव के हालात बन गए हैं। इस मामले के गणित को समझने के लिए 2015 की शुरुआत में चलना होगा। जब फरवरी 2015 में पूर्ण बहुमत वाली आप सरकार बनी थी। मगर सरकार के गठन के समय ही बगावत के सुर उठने लगे थे। इसके पीछे केजरीवाल का अहम था। चुनाव जीतने के बाद केजरीवाल को लगने लगा था कि सब कुछ उनके नाम पर ही हुआ है। सूत्रों की माने तो केजरीवाल पार्टी की पहली पंक्ति के दूसरे नेताओं को सम्मान तक नहीं दे रहे थे। चुनाव जीतने वाले कई विधायक को प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव आदि की सिफारिश पर टिकट मिला था। पार्टी के ये विधायक इन नेताओं के प्रति समर्पित भी थे। मगर इसी बीच केजरीवाल ने अहम के चलते प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, प्रो. आनंद कुमार को पार्टी से बाहर निकालने का मन बना लिया। मगर केजरीवाल को डर था कि ये लोग पार्टी से बार निकाले गए तो पार्टी टूट सकती है। ऐसे में केजरीवाल ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव बना दिया।

अयोग्‍य करार दिए गए विधायकों पर किया खर्च
दिल्ली सरकार के अलग-अलग विभाग के प्रमुखों ने लाखों रुपये इन विधायकों की सुविधाओं पर खर्च करने की जानकारी चुनाव आयोग से लेकर अदालत तक को दी है। यह दस्तावेज दैनिक जागरण के पास भी है। लोक निर्माण विभाग व वित्त विभाग के अनुसार संसदीय सचिव बनने के बाद सबसे पहले विधायकों को उठने-बैठने के लिए कमरे की जरूरत पड़ी। कुछ को सचिवालय में तो कुछ को अन्य सरकारी कार्यालयों में कमरे दिए गए। उनके बैठने के लिए 21 कुर्सियां तथा उनसे मिलने के लिए आने-जाने वाले लोगों के बैठने के लिए 136 विजिटर्स कुर्सियां खरीदी गईं। लोक निर्माण विभाग ने इस मद में 11,75,828 रुपये का भुगतान किया। उसके बाद कार्यालय को रंग-रोगन व अन्य फर्नीचर खरीदने के मद में विभाग ने 13,26,300 रुपये खर्चे। इसकी स्वीकृति को लेकर शुरू में दिक्कतें आईं, लेकिन सरकार के इशारे से सब बिल पास हो गया।

लांबा को दिए दो कमरों की साज सज्जा पर लाखों खर्च
चांदनी चौक से आप विधायक अलका लांबा को दो कमरे दिए गए थे। इसकी साज-सज्जा में ही लाखों रुपये खर्च हो गए। द्वारका से आप विधायक आदर्श शास्त्री, जो आइटी मंत्री के संसदीय सचिव थे, उनको इम्पावरिंग डिजिटल इंडिया की कांफ्रेंस में शामिल होने के लिए 15,479 रुपये दिए गए थे। इतना ही नहीं दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव ने ही चुनाव आयोग को जानकारी दी है कि गत सितंबर माह तक संसदीय सचिव बने विधायक 20 से अधिक ऐसी बैठकों में शामिल हुए हैं जिसे मंत्री को लेना चाहिए। वह या तो मंत्री के साथ थे या मंत्री की अनुपस्थिति में बैठक में उपस्थित रहे।

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