दिल्ली के बवाना में ग्राउंड फ्लोर पर लगी आग, सीढ़ियों पर भी मिलीं लाशें

राजधानी के बवाना इंडस्ट्रियल एरियामें शनिवार को 3 फैक्ट्रियों में भीषण आग लग गई। इस हादसे में 17 लोगों की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल हो गए। फायर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक प्राथमिक जांच में लग रहा है कि फैक्ट्री के ग्राउंड फ्लोर पर आग लगी थी। इसके बाद आग ने धीरे-धीरे फैक्ट्री को अपनी चपेट में लिया क्योंकि फैक्ट्री में पटाखे रखे हुए थे। इस वजह से उनमें धमाका भी हुआ और बहुत धुआं भी निकला। इससे जो गैस निकली उसने लोगों को संभलने का मौका नहीं दिया।दिल्ली के बवाना में ग्राउंड फ्लोर पर लगी आग, सीढ़ियों पर भी मिलीं लाशें

 

विभाग के अधिकारियों के अनुसार ऐसे मौकों पर अगर कोई सांस रोककर उस जगह से बाहर निकल जाए तो उसकी ही जान बच सकती है। अगर सांस रोककर धुएं को शरीर में जाने से नहीं रोका गया तो आदमी कुछ ही देर में बेहोश हो जाता है। लगता है इसी तरह का हादसा यहां भी हुआ होगा। लोग जान बचाने के लिए शायद भागे तो थे क्योंकि कुछ लोगों के शव सीढ़ियों पर भी मिले हैं। माना जा रहा है कि वह पहले धुएं के कारण दम घुटने से बेहोश हो गए होंगे। इसके बाद वह आग की चपेट में भी आए होंगे। फायर अधिकारियों का कहना है कि फैक्ट्री बहुत बड़ी नहीं है लेकिन मौके को देखकर लगता है कि यहां हाथों से ही पटाखे बनाने आदि का काम किया जाता होगा। 

फायर विभाग ने बताया कि आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की 30 गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। आग पर पूरी तरह से रात 9:05 बजे तक काबू पा लिया गया था। इससे पहले कुछ शवों को फैक्ट्री से बाहर निकाला भी गया था। पटाखों से जो गैस निकलती है, वह बहुत ही खतरनाक होती है। अधिकारियों का कहना है कि फैक्ट्री में मौजूद एक शख्स ने पहली मंजिल से कूदकर अपनी जान बचाई। 18 लोगों में केवल वही अकेला ऐसा रहा, जो इस हादसे में बचने में कामयाब रहा। इस बारे में जांच की जा रही है कि आखिर अन्य लोग भागने में कामयाब क्यों नहीं हो पाए। हो सकता है कि अन्य लोगों ने पहली मंजिल से कूदने में साहस नहीं दिखाया हो। जब तक वह हिम्मत कर पाते तब तक देर हो चुकी होगी ओर वह अंदर ही बेहोश हो गए होंगे। 
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