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दुनियाभर में कम उम्र में ही लोग तम्बाकू के उत्पादों का करने लगते है सेवन, जानिए इससे जुडी पांच गलत ….

तंबाकू जानलेवा है बावजूद इसके दुनियाभर में इसकी खपत साल दर साल बढ़ती ही गई है. हर साल इससे होनी वाली विभिन्न बीमारियों के चलते लाखों लोगों की मौत हो जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि दुनियाभर में कम उम्र में होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण तम्बाकू के तमाम उत्पादों का सेवन भी है. आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि कई विकासशील देशों में इसका उपभोग तेजी से बढ़ता गया है. साल 2015 में ‘जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंड डायग्नोस्टिक’ रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, भारत तम्बाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है. यहां करीब 275 मिलियन यानी करीब 27.5 करोड़ युवा तम्बाकू के विभिन्न उत्पादों का सेवन करते हैं.

तम्बाकू का सेवन एक प्रकार की लत है. कई लोग इसे छोड़ना तो चाहते हैं पर छोड़ नहीं पाते हैं. समाज में कई सारे ऐसे मिथ भी हैं जो संभवत: तम्बाकू सेवन करने वालों को इसे छोड़ने से रोक रहे हैं. साल 2005 में’ अमेरिकन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ’ में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि कई मिथ ऐसे हैं जो लोगों को धूम्रपान शुरू करने और उसे करते रहने के लिए प्रेरित करते हैं. इतना ही नहीं ये मिथ इतने प्रभावी हैं कि इसी के चलते कई चिकित्सक और नीति निर्माता भी इन उत्पादों के लती बने हुए हैं.

इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही मिथकों के बारे में बताएंगे.

मिथ 1: निकोटीन, सिगरेट का सबसे हानिकारक घटक है

निकोटीन निश्चित रूप से नशे की लत है, लेकिन इसके अलावा भी सिगरेट में कई ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो स्वास्थ्य को काफी हानि पहुंचाते हैं. ‘अमेरिकन लंग एसोसिएशन’ के अनुसार, सिगरेट में 7,000 से अधिक रसायन होते हैं. इनमें से करीब 69 ऐसे हैं जो विभिन्न प्रकार के कैंसर को बढ़ावा देते हैं. कई अन्य रसायन जहरीले भी होते हैं. ऐसे में सिर्फ निकोटीन ही हानिकारक है, यह कहना पूरी तरह से सही नहीं है.

मिथ 2: धूम्रपान से तनाव में राहत मिलती है

धूम्रपान को लेकर फैली यह सबसे आम मिथ है. अगर आप इस बारे में किसी धूम्रपान करने वाले से पूछेंगे तो वह इसे सत्य ही बताएगा, जबकि विज्ञान इसे नकारता है. वास्तव में धूम्रपान तनाव को बढ़ाता है. जब आप धूम्रपान नहीं करते हैं तो आपका शरीर निकोटीन की कमी महसूस करता है. ऐसे में आपको कुछ खोया-खोया सा महसूस होता है, इससे आपका तनाव बढ़ता है, जिसका सीधा असर आपके मूड पर पड़ता है. जैसे ही आप सिगरेट पीते हैं और निकोटीन दोबारा शरीर में प्रवेश करता है तो ये सारे लक्षण दूर होने लगते हैं. ऐसे में आपको लगता है कि आप तनाव मुक्त हो रहे हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है. यह साबित करता है कि आप लती हो चुके हैं.

मिथ 3 : माइल्ड लेवल वाले सिगरेट कम हानिकारक हैं

धूम्रपान करने वालों में एक आम अवधारणा है कि जिन सिगरेटों पर माइल्ड या फिर लाइट लिखा होता है, वह स्वास्थ्य के लिए दूसरे सिगरेटों से कम हानिकारक हैं. इसी बारे में ‘अमेरिकन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ’ में छपे एक अध्ययन के मुताबिक धूम्रपान करने वाले 10 फीसदी से कम लोगों को ही पता होता है कि लाइट,अल्ट्रा-लाइट या अल्ट्रा-माइल्ड सिगरेटों से भी उतनी ही मात्रा में टार निकलती है जितनी अन्य सिगरेटों से. सिगरेट के डिब्बों पर लगे ये लेवल सिर्फ कम हानिकारक होने का आभास कराते हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा है नहीं.

मिथ 4: दिन में एक-दो सिगरेट पीने से नुकसान नहीं है।

साल 2015 में बीएमसी मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक अगर आप धूम्रपान या तम्बाकू छोड़ना चाहते हैं तो यह तभी फायदेमंद है जब आप इसे पूरी तरह से छोड़ दें. अगर आप दिन में एक-दो सिगरेट पीते हैं, लेकिन ज्यादा कश और इसे अधिक गहराई तक ले जाते हैं तो यह और ज्यादा नुकसानदायक है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप सिगरेट छोड़ना चाह रहे हैं तो इसे पूरी तरह से छोड़े. दिन में एक दो सिगरेट पीना भी फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है.

मिथ 5: कई साल से धूम्रपान कर रहे हैं तो छोड़ने से कुछ नहीं होगा

धूम्रपान की लत को छोड़ना आवश्यक है. धूम्रपान को पूरी तरह से छोड़कर शरीर को दोबारा स्वस्थ किया जा सकता है. कई अध्ययनों से पता चलता है कि धूम्रपान से दूरी बनाने के कुछ समय बाद से ही आपका शरीर और फेफड़े पुन: ठीक होना शुरू हो जाते हैं. रक्तचाप का स्तर सामान्य होने लगता है, कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर 12 घंटों के भीतर काफी कम हो जाता है. इतना ही नहीं धूम्रपान छोड़ने के एक सप्ताह बाद ही फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार होने लगता है. अगर छोड़ने के एक साल बाद तक आप बिल्कुल भी धूम्रपान नहीं करते हैं तो आपमें हृदय रोग का जोखिम आधा हो सकता है. यदि आप 10-15 वर्षों तक धूम्रपान नहीं करते हैं तो तम्बाकू से संबंधित सभी बीमारियों के जोखिम बहुत कम हो जाते हैं.

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