हाईकोर्ट के बैन के बावजूद आंध्र प्रदेश में कराई जा रही मुर्गों की लड़ाई

आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी में हाईकोर्ट की रोक के बावजूद परंपरा के नाम मुर्गों की लड़ाई आज भी जारी है। आंध्र प्रदेश में भोगी, सक्रांति और कनुमा त्योहारों की धूम के दौरान इस परंपरा का पालन किया जाता है।  खेलों का आयोजन पश्चिमी गोदावरी ही नहीं पूर्वी गोदावरी में भी किया जाता है और इस दौरान मुर्गों की लड़ाई को देखने वालों की भीड़ उमड़ जाती है। बताया जाता है कि राज्य में करीब 200 जगहों पर मुर्गों की लड़ाई करवाई जाती है और ये आयोजन इतना बड़ा होता है कि लोग इस देखे बिना रह नहीं पाते हैं।

 आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी में हाईकोर्ट की रोक के बावजूद परंपरा के नाम मुर्गों की लड़ाई आज भी जारी है। आंध्र प्रदेश में भोगी, सक्रांति और कनुमा त्योहारों की धूम के दौरान इस परंपरा का पालन किया जाता है।  खेलों का आयोजन पश्चिमी गोदावरी ही नहीं पूर्वी गोदावरी में भी किया जाता है और इस दौरान मुर्गों की लड़ाई को देखने वालों की भीड़ उमड़ जाती है। बताया जाता है कि राज्य में करीब 200 जगहों पर मुर्गों की लड़ाई करवाई जाती है और ये आयोजन इतना बड़ा होता है कि लोग इस देखे बिना रह नहीं पाते हैं।

 

करोड़ों का लगता है सट्टा

इस दौरान मौके पर शराब के स्टाल समेत बिरयानी का भी प्रबंध किया जाता है। मुर्गों की लड़ाई में हिस्सा लेने वाले सट्टबाजी करने से भी पीछे नहीं रहते, जिसकी वजह से करोड़ों रुपये का सट्टा लगता है। पिछले साल करीब 800 करोड़ रुपये का सट्टा लगा था, जिनमें विजेता मुर्गे ने 1 करोड़ रुपये की धनराशि जीती थी।​
 
 
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