आलू किसानों केलिए बड़ीखबर, रेट गिरने पर दाम में अंतर की भरपाई करेगी सरकार

राज्य सरकार आलू उत्पादक किसानों को बड़ी राहत देने जा रही है। एक निश्चित मूल्य से आलू का बाजार भाव गिरने पर अंतर की भरपाई किसानों को सरकारी खजाने से की जाएगी। इस निश्चित मूल्य की घोषणा मंत्री समूह की रिपोर्ट मिलने के बाद की जाएगी।

हालांकि यह मूल्य 600-700 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रखने पर सहमति करीब-करीब बन चुकी है। इतना ही नहीं, दूसरे राज्यों में आलू भेजने पर ट्रांसपोर्टेशन खर्च में भी भारी छूट दी जाएगी।

योगी सरकार आलू को किसी भी हालत में राजनीतिक मुद्दा नहीं बनने देना चाहती।

यही वजह है कि इन किसानों की समस्याओं के हल के लिए उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अध्यक्षता में चार सदस्यीय मंत्री समूह का गठन किया किया गया है। शासन के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश सरकार आलू का एक मॉडल रेट घोषित करेगी। यह मॉडल रेट दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश और हरियाणा की मंडियों में आलू के भाव के आधार पर तय किया जाएगा।

अगर यूपी की मंडियों में आलू उत्पादक किसानों को मॉडल रेट से कम दाम मिल रहा होगा तो मूल्य में इस अंतर की भरपाई प्रदेश सरकार अपने संसाधनों से करेगी। यह सुविधा सिर्फ लघु और सीमांत किसानों के लिए होगी। एक हेक्टेयर तक की जोत वाले सीमांत और दो हेक्टेयर तक की जोत वाले लघु किसान की श्रेणी में आते हैं।

ढाई गुनी होगी ट्रांसपोर्ट सब्सिडी

इसके अलावा ट्रांसपोर्ट सब्सिडी भी बढ़ाई जाएगी। अभी प्रदेश के बाहर आलू भेजने पर कुल ट्रांसपोर्टेशन खर्च का 25 फीसदी या अधिकतम 50 रुपये प्रति क्विंटल का भार सरकार वहन करती है। नई व्यवस्था में रेलवे रैक से आलू बाहर भेजने पर अधिकतम 120 रुपये प्रति क्विंटल का ट्रांसपोर्टेशन खर्च सरकार वहन करेगी।

1.60 लाख मीट्रिक टन आलू उत्पादन की उम्मीद
इस बार प्रदेश में रिकॉर्ड 1.60 लाख मीट्रिक टन आलू के उत्पादन का अनुमान है। कुल 6.15 लाख हेक्टेयर रकबे में आलू की बोआई हुई है। स्टोर किए जाने लायक नये आलू की आमद बाजार में 20 फरवरी के बाद शुरू हो जाएगी।

 
 
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