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IS और AQIS की तरफ बढ़ रहा कश्मीरी युवाओं का झुकाव, बढ़ी निगरानी

कश्मीर में युवाओं के एक छोटे से समूह के खूंंखार आतंकवादी संगठनों इस्लामिक स्टेट, अलकायदा इन इंडियन सबकॉंटिनंट (AQIS) की जिहादी विचारधारा को अपनाने को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने तकनीकी निगरानी बढ़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियां न केवल कश्मीरी युवाओं के कट्टरपंथ की ओर झुकाव पर नजर रख रही हैं बल्कि जहां जरूरी लग रहा है, वहां हस्तक्षेप भी कर रही हैं।IS और AQIS की तरफ बढ़ रहा कश्मीरी युवाओं का झुकाव, बढ़ी निगरानी

एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी ने कहा, ‘IS और AQIS का ऑनलाइन जिहादी दुष्प्रचार युवाओं को आकर्षित कर रहा है। विशेषकर ऐसे कश्मीरी युवाओं को जो इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं और खुद को अलग-थलग महसूस करते हुए पले बढ़े हैं। इनमें से कई ऐसे युवा हैं जो हिज्बुल मुजाहिदीन, लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों की आजादी के नाम पर सीधी भर्ती के बजाय IS के दुष्प्रचार से खुद को ज्यादा जोड़ते हैं।’ 

आजादी समर्थक आतंकी गुटों से हो रहे अलग 
जम्मू-कश्मीर पर लंबे समय से नजर रखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि शुरुआती धुर कट्टरपंथी कश्मीरी नेताओं में संभवत: अब्दुल कयूम नजर था। नजर एक स्थानीय आतंकी था और वर्ष 2015 में उसने हिज्बुल मुजाहिदीन से अलग होकर अपना खुद का संगठन लश्कर-ए-इस्लाम बनाया था। इसके बाद बुरहान वानी और जाकिर मूसा ने उसका अनुसरण किया। 

उन्होंने कहा, ‘इन तीनों ने ही आजादी समर्थक गुटों जैसे हिज्बुल मुजाहिदीन की छाया से निकलना उचित समझा। नजर पिछले साल पाक अधिकृत कश्मीर से घुसपैठ करते समय मारा गया था। उसने घाटी में संचार टॉवरों को निशाना बनाया था। साथ ही उसने आजादी समर्थक गुटों तथा सैयद अली शाह गिलानी से जुड़े गुटों से खुद को 

अलग कर लिया था। बुरहान वानी सोशल मीडिया और आईएस से प्रेरित विडियो के जरिए कश्मीरी युवाओं से संपर्क साधता था। 

कश्मीर में लागू करना चाहते हैं खलीफा का शासन 
अधिकारी ने कहा, ‘और ज्यादा धुर कट्टरपंथी तत्व पैदा हो रहे हैं जो जिहादी विचारधारा की ओर झुकाव रखते हैं। वे न केवल आजादी हासिल करना चाहते हैं बल्कि खलीफा का शासन स्थापित करना चाहते हैं।’ उन्होंने कहा कि ये तत्व अभी एकजुट होने की बजाय बिखरे हुए हैं, इसलिए नियंत्रण में हैं। 

एक पर्यवेक्षक ने कहा, ‘ये दो से तीन लोगों की स्वप्रेरित और स्वतंत्र यूनिटें हमले की साजिश रचती हैं लेकिन स्थानीय लोगों की मदद और संसाधनों के बिना उनकी क्षमता सीमित है। पाकिस्तान स्थित गुट भी उन्हें आगे बढ़ते नहीं देखना चाहेंगे क्योंकि इससे कश्मीर पर उनकी पकड़ ढीली पड़ सकती है।’ खुफिया एजेंसियों ने ऐसे युवाओं पर अब अपनी निगरानी बढ़ा दी है। 

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