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कैंसर की अगर जल्द पहचान हो जाए तो इलाज का खर्च हो सकता है कम

भारतीयों की उन्नति और लंबी आयु के सपने के बीच स्वास्थ्य से जुड़ी एक त्रासदी खड़ी है और वह उम्र से जुड़ी दीर्घकालिक बीमारियां जैसे- कैंसर। हमारे सहयोगी अखबर टाइम्स ऑफ इंडिया और अपोलो कैंसर सेंटर ने मिलकर एक पहल की है जिसका नाम है- ऑउटस्मार्ट कैंसर यानी कैंसर को हराना है। इसके तहत हमने कई डॉक्टरों से बात की और उन्होंने हमें बताया कि भारत में हर साल कैंसर के 10 लाख नए मरीज सामने आते हैं। बीमारी की गंभीरता की वजह से इन 10 लाख में से 7 लाख मरीजों की मौत हो जाती है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की मानें तो 2020 तक मरीजों की संख्या 17.8 लाख और मौतों की संख्या 8.8 लाख हो जाएगी।कैंसर की अगर जल्द पहचान हो जाए तो इलाज का खर्च हो सकता है कम

इस बीमारी में सिर्फ मौत का ही आंकड़ा बहुत ज्यादा नहीं है बल्कि कैंसर के मरीजों को शारीरिक रूप से भी काफी कष्ट झेलना पड़ता है जिसमें जहरीली कीमोथेरपी और इमोश्नल ट्रॉमा भी शामिल है। कैंसर सर्जन और ऐंटि-टोबैको ऐक्टिविस्ट डॉ पंकज चतुर्वेदी कहते हैं, ‘कैंसर की वजह से लोगों को अपनी जिंदगी में मानसिक, सामाजिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती है।’ यही वजह है कि अनुसंधानकर्ता लंबे समय से कैंसर को हराने की कोशिशों में जुटे हैं। कोई ऐसा डायग्नोस्टिक टेस्ट जिससे कैंसर का पता लगाया जा सके या फिर कोई कैंसर वैक्सीन जिससे कैंसर होने से बचा जा सके….इस तरह की चीजों की खोज में अनुसंधानकर्ता लगे हैं लेकिन उन्हें अब तक सफलता नहीं मिली है। हालांकि डॉक्टरों ने क्या करें और क्या न करें एक लिस्ट तैयार की है जिससे कैंसर से जुड़े स्ट्रेस को कम किया जा सकता है। 
 एक सवाल जो शहरों में रहने वाले भारतीयों के मन में होता है- क्या नियमित चेकअप के जरिए कैंसर को हराया जा सकता है? मुंबई के परेल स्थित टाटा मेमोरियल अस्पताल के मेडिकल ऑन्कॉलजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ श्रीपद बानवाली कहते हैं कि स्क्रीनिंग और नियमित चेकअप के जरिए कुछ हद तक मदद मिल सकती है लेकिन यह कैंसर जैसी बीमारी का पता लगाने का फुलप्रूफ तरीका नहीं है। डॉ श्रीपद कहते हैं, ‘जो लोग नियमित रूप से अपना चेकअप करवाते रहते हैं वे अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग रहते हैं और अगर उन्हें किसी तरह की गांठ या सूजन महसूस होती है तो वे उसका मूल्यांकन करवा सकते हैं। लिहाजा नियमित रूप से चेकअप करवाते रहने से अप्रत्यक्ष रूप मदद जरूर मिलती है।’ 

सामान्य कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC) टेस्ट से लेकर CA125 टेस्ट, मैमोग्राम, पैप स्मियर और वार्षिक चेकअप.. इन सबसे कुछ मदद मिल सकती है। लगातार ब्लड टेस्ट में WBC की ज्यादा मौजूदगी या फिर मल में रहस्यमय खून की मौजूदगी, कैंसर के बारे में संकेत देते हैं। डॉ श्रीपद कहते हैं, ‘इन संकेतों के बाद डॉक्टर मरीज से कह सकते हैं कि उन्हें कैंसर की पहचान के लिए सभी जरूरी टेस्ट करवाने चाहिए। हालांकि, कैंसर की जल्द पहचान के लिए जरूरी है कि ब्लड टेस्ट के साथ ही बेहतर वार्षित शारीरिक चेकअप और सोनोग्राफी स्कैन भी किया जाए।

वहीं, दूसरी तरफ डॉक्टर्स कहते हैं कि भारत के लोग चाहें तो बेहतर लाइफस्टाइल को चुनकर कैंसर को हरा सकते हैं। दुनियाभर के करीब दो तिहाई कैंसर के केस लाइफस्टाइल से जुड़े होते हैं। इसका मतलब है कि इसकी रोकथामकी जा सकती है। तंबाकू और ऐल्कॉहॉल के बारे में जागरूकता फैलानी जरूरी है ताकि लोगों को पता हो कि ये ऐसी चीजें हैं जिनसे टीशूज़ में कैंसर उत्पन्न हो सकता है। इसके अलावा मोटापा भी कैंसर का एक बड़ा रिस्क फैक्टर है। 

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि सरकार को भी कैंसर की रोकथाम में आगे आकर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। कैंसर की रोकथाम के लिए स्वस्थ लाइफस्टाइल सबसे अहम है। भारत जैसा देश अपने सभी कैंसर के मरीजों के इलाज का खर्च नहीं उठा सकता लेकिन जागरूकता फैलाकर कैंसर के लक्षणों और इसकी जल्द पहचान को संभव किया जा सकता है। 

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