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आम्बेडकर की प्रतिमा हटाकर थाने में रखी, हंगामा

वकीलों ने कचहरी परिसर में डॉ. भीमराव आम्बेडकर की जो प्रतिमा लगाई थी, पुलिस-प्रशासन ने उसे 24 घंटे के भीतर वहां से हटाकर कविनगर थाने में पहुंचा दिया। प्रशासनिक अमला कई जिलों की पुलिस फोर्स के साथ सोमवार रात कचहरी में पहुंचा और पूरी कार्रवाई की। आरोप है कि इस दौरान वकीलों से मारपीट की गई।आम्बेडकर की प्रतिमा हटाकर थाने में रखी, हंगामा

 घटना का विडियो बना रहे दो अधिवक्ताओं के फोन छीन लिए गए और एक वकील को एक घंटे तक अवैध हिरासत में रखा गया। इसके विरोध में मंगलवार को दिनभर हंगामा होता रहा। अधिवक्ता हड़ताल पर चले गए। इसके चलते एक भी मामले की सुनवाई नहीं हो पाई। प्रशासन ने अवैध ढंग से प्रतिमा स्थापित करने के मामले में 17 वकीलों के खिलाफ केस दर्ज कराया है। दूसरी ओर वकीलों ने कहा है कि वे भी पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों समेत 250 पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट लिखाएंगे। रिपोर्ट नहीं लिखी गई तो अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा। 

इस बीच शाम को दोनों पक्षों के बीच बैठक हुई। इसमें तय हुआ कि बार असोसिएशन मूर्ति लगाने के लिए आवेदन करेगी। तब तक यथास्थिति रहेगी। वकील शांति बनाकर रखेंगे। एडीएम सिटी हिमांशु गौतम ने बताया, ‘बार असोसिएशन के पदाधिकारियों, एसएसपी और डीएम के बीच लंबी बैठक हुई। इसमें सहमति बनी है कि असोसिएशन प्रतिमा लगवाने के लिए विधिवत इजाजत लेगी। प्रशासन बार एसोसिएशन के आवेदन को सरकार के पास भेजेगा। वहां से अनुमति मिल गई तो प्रशासन को प्रतिमा लगाने से कोई आपत्ति नहीं है।’ 

क्रेन, जेसीबी के साथ पहुंचे अधिकारी 
वकीलों ने रविवार देर रात कचहरी परिसर स्थित कमर्शल टैक्स ऑफिस के गेट के पास डॉ. आम्बेडकर की प्रतिमा स्थापित कर दी थी। इसकी सूचना पर पुलिस प्रतिमा को हटाने के लिए पहुंची थी, लेकिन विरोध के चलते पीछे हटना पड़ा। सोमवार को भी कचहरी परिसर में दिनभर तनाव की स्थिति थी। पुलिस-प्रशासन पूरे मामले पर नजर रखे हुए था। बताया जा रहा है कि सोमवार रात करीब 2 बजे पुलिस और प्रशासन के आलाधिकारी मेरठ, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। साथ में क्रेन और जेसीबी भी थे। 

वकीलों का कहना है कि अधिकारियों के इशारे पर प्रतिमा के ढांचे को गैस कटर से काटा गया। इसका विरोध करने पर उनके साथ मारपीट हुई। विडियो बना रहे अधिवक्ता रविकरन और हरेंद्र के मोबाइल फोन छीन लिए गए। पुलिस ने अधिवक्ता सुभाष मुखी को अवैध हिरासत में ले लिया। प्रशासन को अंदेशा था कि उसकी इस कार्रवाई से हंगामा होगा। इसी के चलते मंगलवार सुबह से ही कचहरी परिसर को छावनी में बदल दिया गया था। अधिवक्ता सुबह 8 बजे से जुटने शुरू हुए। उन्होंने डॉ. आम्बेडकर का फोटो लगाकर कैंडल जलाया और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। 

घंटों रही तनाव की स्थिति 
मामला बढ़ने लगा तो सुबह 9 बजे एडीएम-ई ज्ञानेंद्र सिंह, एडीएम सिटी हिमांशु गौतम, एसडीएम सदर अमितपाल, सिटी मैजिस्ट्रेट प्रदीप दुबे और एसपी सिटी आकाश तोमर सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित वकीलों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात और बिगड़ गई। दोनों पक्षों में नोकझोंक होने लगी। इसके बाद अधिकारी एक तरफ खड़े हो गए। घंटों यही स्थिति रही। एक तरफ प्रशासनिक अमला और दूसरी तरफ वकील डटे हुए थे। 

फोर्स देखकर भड़के बार अध्यक्ष 
सुबह 11:30 बजे बार असोसिएशन के अध्यक्ष राकेश त्यागी काकड़ा और सचिव परविंदर नागर कचहरी पहुंचे। पुलिस फोर्स को देख वे आक्रोशित हो गए और हड़ताल का प्रस्ताव कर दिया। दोपहर 2 बजे असोसिएशन की जनरल बॉडी मीटिंग हुई। इसमें कहा गया कि प्रशासन ने डॉ. आम्बेडकर का अपमान किया है। वकीलों के साथ अभद्रता हुई है। ये चीजें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। प्रशासन डॉ. आम्बेडकर की प्रतिमा लौटाए और वकीलों पर दर्ज एफआईआर वापस ले। ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन करेंगे। इसमें पश्चिमी यूपी के अधिवक्ताओं को भी जोड़ेंगे। 

इन वकीलों पर दर्ज हुआ केस 
कचहरी परिसर में अवैध रूप से डॉ. आम्बेडकर की प्रतिमा स्थापित करने के मामले में कलेक्ट्रेट के नाजिर सदर असगर अली ने बार असोसिएशन के अध्यक्ष राकेश त्यागी काकड़ा, सचिव परविंदर नागर, उपाध्यक्ष चंद्रभान शर्मा, विक्रांत पाराशर, कोषाध्यक्ष हरेंद्र तंवर, राहुल कुमार शर्मा, मनोज कुमार शर्मा, चौ. अजयपाल सिंह (रावली), अशोक चौधरी, शैलेंद्र त्यागी, हनीफ खान, सर्वेश शर्मा, हसमत अली, भावना वर्मा, विश्व प्रताप सिंह, सुनील वर्मा, प्रदीप शर्मा के खिलाफ कविनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। 
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