Wednesday , December 2 2020

इस ‘मां’ को तो मां का मतलब भी ठीक से नहीं है पता

उसे अभी सही से ‘मां’ अर्थ तक नहीं पता। उसके लिए मां का अर्थ है उसकी खुद की मां। ऐसी खेलने कूदने की उम्र में एक उसने एक बच्चे को जन्म दिया। अगर उसकी जिंदगी को खतरा न होता तो शायद किसी को पता भी न चलता कि उसके साथ क्या हुआ। बच्ची अपने साथ हुई ज्यादती को समझती तक नहीं है। जन्म लेते ही बच्चे से मोड़ लिया था मुंह

कितना अमानवीय है ये समाज. जिस बच्ची को अभी मां शब्द का अर्थ भी पता नहीं उसे इस गहरे दलदल मे धकेल दिया. क्या वो इंसान फांसी का हकदार नहीं है जिसने ये कुकृत्य किया है.

पुलिस  ने बच्ची से जबरदस्ती करने वाले को पकड़ भले ही लिया हो, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती 14 साल की मासूम ‘मां’ और उसके बच्चे के भविष्य को लेकर सबके सामने खड़ी है। क्योंकि बदनामी के डर से मां अपनी बेटी और उसके बच्चे को साथ नहीं ले जाना चाहती है। दोनों को राजकीय महिला शरणालय में रखा गया है। 

पानी भरने गई थी तब हुआ रेप 
बच्ची ने मां को बताया कि एक दिन वह घर के पीछे पानी भरने गई थी। वहीं पर एक शौचालय  बना है। युवक ने उसे वहीं बंद करके उसके साथ रेप किया। यहां तक कि उसने बच्ची को धमकी भी दी। 

चार महीने बाद पता चला 
पहली बार मासिक धर्म आने के बाद कई बार तीन से चार महीने बाद मासिक धर्म शुरू होता है। 14 साल की बच्ची की मां ने भी सोचा कि अभी उनकी बच्ची को सयाना होने में समय है। बच्ची की मां या बच्ची को भनक तक नहीं लगी कि वह गर्भवती  है। 

मां ने बताया कि 5 महीने पहले उनकी बेटी के पेट में दर्द उठा। वह उसे लेकर प्राइवेट डॉक्टर के पास गईं। वहां उन्हें पता चला कि उनकी बेटी गर्भवती है। उनके पैरों के तले से जमीन खिसक गई। उन्होंने बच्ची से पूछा तब उसने बताया कि पड़ोस में रहने वाले युवक ने ही उसके साथ रेप किया है। 

बंद हुई पढ़ाई, घर में कैद 
मां ने बताया कि उन्होंने प्रयास किया कि बेटी का गर्भपात करवा दें, लेकिन कोई डॉक्टर राजी नहीं हुई। आखिर उन्होंने बच्ची को घर में कैद कर दिया। वह पास के प्राथमिक स्कूल में पढ़ने जाती थी, लेकिन उसका स्कूल जाना बंद करवा दिया गया। बदनामी से बचाने के लिए मां ने समाज की नजरों से बच्ची को पांच महीने तक बचाकर रखा। घर में शौचालय नहीं था, इसलिए बच्ची को दिनभर इतना खाना-पीना दिया जाता था कि उसे शौच के लिए जाना न पड़े। 14 साल की बच्ची की मां ने बताया कि वह अंधेरे में किशोरी को टॉइलट ले जाती थी। 

आवाज न निकले इसलिए बंद किया मुंह 
30 दिसंबर की रात से बच्ची के पेट में दर्द उठा। बच्ची दर्द से तड़प रही थी। उसके मुंह से चीख निकलने पर मां ने उसका मुंह बंद कर दिया। उसके पड़ोस में रहे वाली एक लड़की शांति को कुछ शक हुआ। शांति ‘यह एक सोच’ फाउंडेशन के साथ काम करती है। उसने उसकी संस्था की मधुलिका मिश्रा, हिबा फातिमा और स्वाती को सूचना दी। वे लोग रात में ही बच्ची के घर पहुंचे। 

अस्पताल ले जाने को नहीं था राजी 
स्वाती ने बताया कि रात का 2 बज चुका था बच्ची दर्द से बेहाल थी पर उसकी मां उसे अस्पताल  ले जाने को राजी नहीं थी। उन लोगों के फोन करने पर तीन ऐम्बुलेंस पहुंच चुकी थीं। उन लोगों ने बच्ची की मां की काउंसलिंग की, लेकिन वह कुछ सुनने को तैयार नहीं थी। संस्था के लोगों ने आशा ज्योति केंद्र में बात की। वहां से काउंसलर्स आए और फिर उसकी मां को समझाने का प्रयास किया। 31 दिसंबर की सुबह करीब पांच बजे बच्ची को काफी मशक्कत के बाद आरएमएल अस्पताल लाया गया। जहां एक घंटे में ही उसने एक बच्चे को जन्म दिया। 

मां के पास थे सिर्फ दो रुपये 
स्वाती ने बताया कि बच्ची की मां इतनी गरीब है कि उसके पास उस समय मात्र दो रुपये थे। जब उन लोगों ने उसे समझाया तो वह झल्लाकर बोली कि उसके पास सिर्फ दो रुपये हैं, वह क्या करे? इसके बाद संस्था के लोगों ने उसकी हर तरह से मदद करने का भी आश्वासन दिया। 

दूसरी महिलाएं पिला रहीं दूध 
महिला शरणालय के अधीक्षिका आरती सिंह ने बताया कि बच्ची को सोमवार रात संस्था में लाया गया। उसने एक भी बार बच्चे को हाथ तक नहीं लगाया। भूख + से तड़पते बच्चे को दूध पिलाने को कहा गया तो वह करवट बदलकर आंख बंद कर लेती है। उसे न तो किसी की बात सुनाई देती है न ही बच्चे के रोने की आवाज। आरती सिंह ने बताया कि संस्था में एक दूसरी महिला को पिछले हफ्ते बच्चा हुआ है। अब वह महिला ही बच्ची के बच्चे को दूध पिला रही है। 

 
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