दिल्ली को मिलने वाला है नया कांग्रेस अध्यक्ष, दौड़ में हैं ये दो नाम; सोनिया जल्द देंगी मंजूरी

 तकरीबन पौने दो महीने की जद्दोजहद के बाद कांग्रेस दिल्ली में अनुभवी युवा पर दांव खेल सकती है। बुजुर्ग और अनुभवहीन युवा नेताओं को प्रदेश कांग्रेस की बागडोर सौंपे जाने में संदेह है। इन हालातों में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन या अरविंदर सिंह लवली में से ही किसी एक को प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनाया जा सकता है। इस आशय की औपचारिक घोषणा भी जल्द ही होने के आसार हैं।

विश्ववस्त सूत्रों के मुताबिक, पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी पीसी चाको के बीच प्रदेश अध्यक्ष के लिए संभावित सभी नामों पर विस्तार से चर्चा हो चुकी है। इस चर्चा में ज्यादातर नाम किसी न किसी आपत्ति के साथ दरकिनार कर दिए गए हैं। अब केवल दो नाम विचाराधीन हैं। प्रबल संभावना है कि सोनिया इन्हीं में से किसी एक नाम पर अपनी मुहर लगाएंगी।

सूत्र बताते हैं कि सभी नामों पर चर्चा का आधार दिल्ली का मौजूदा सियासी माहौल रहा है। कांग्रेस किसी ऐसे नेता को प्रदेश की कमान सौंपना चाहती है जो आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच में पुरजोर तरीके से कांग्रेस को भी त्रिकोणीय मुकाबले की वजह बना सके। पार्टी का मानना है कि चूंकि दिल्ली विधानसभा चुनाव में बहुत अधिक समय नहीं बचा है, किसी भी तरह का प्रयाेग नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए जो भी निर्णय लिया जाए, वह गंभीरता से लिया जाए।

बताया जाता है कि उक्त बिंदुओं के मददेनजर सोनिया और पीसी चाको की चर्चा में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जेपी अग्रवाल, सुभाष चोपड़ा और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष योगानंद शास्त्री के नाम पर इसलिए सहमति नहीं बनी क्योंकि सुभाष और योगानंद जहां सक्रिय राजनीति से ही दूर हैं, वहीं जेपी खुद से भी अपनी अनिच्छा जाहिर कर चुके हैं।

तीनों की उम्र भी पार्टी को प्रदेश इकाई में उत्साह का संचार करने वाली नहीं लग रही। मौजूदा कार्यकारी अध्यक्ष राजेश लिलोठिया सहित किसी दलित चेहरे पर पार्टी इसलिए दांव नहीं लगाना चाह रही, क्योंकि हरियाणा कांग्रेस की कमान पहले ही दलित नेता के तौर पर कुमारी शैलजा को दे दी गई है। दिल्ली और हरियाणा आपस में काफी जुड़े हुए हैं, इसलिए पार्टी दोनों जगह दलित चेहरा नहीं रखना चाहती।

सूत्र बताते हैं कि प्रदेश कांग्रेस के तीनों मौजूदा कार्यकारी अध्यक्षों हारून यूसुफ, देवेंद्र यादव, राजेश लिलोठिया के नाम पर चाको अपनी सख्त आपत्ति जता चुके हैं। उनका कहना है कि इनका कार्यकाल ऐसा बिल्कुल नहीं रहा जो इन्हें प्रदेश की कमान सौंपी जाए। पार्टी के इकलौते पूर्वांचली चेहरे महाबल मिश्रा का नाम भी दिल्ली के मौजूदा सियासी हालात में उपयुक्त नहीं समझा गया। संदीप दीक्षित काे अध्यक्ष बनाकर पार्टी कोई जोखिमभरा प्रयोग नहीं करना चाहती। ऐसे में पार्टी के पास अब दो ही नाम बचे हैं माकन और लवली। सोनिया और चाको ने इन दोनों को ही मौजूदा माहौल में प्रदेश कांग्रेस काे संभालने के लिए उपयुक्त समझा है। सोनिया के स्तर पर इनमें से ही किसी एक नाम पर मुहर लगनी है, जोकि संभवतया अगले एक दो दिन में लग जाएगी।

राहुल गांधी के सुझाव पर चाको की आपत्ति

बताया जाता है कि राहुल गांधी ने देवेंद्र यादव या राजेश लिलोठिया में से किसी एक काे अध्यक्ष पद देने का सुझाव दिया था, लेकिन जब एआइसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पीसी चाको से इस बाबत राय मांगी तो उन्होंने आपत्ति जताते हुए दोनों ही नामों को सिरे से नकार दिया।

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