उत्तराखंड में 15 सितंबर को घोषित हो सकता है पंचायत चुनाव का कार्यक्रम

हरिद्वार को छोड़ प्रदेश के शेष 12 जिलों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर कवायद तेज हो गई है। पंचायतों में आरक्षण तय होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रस्तावित कार्यक्रम प्रदेश सरकार को भेज दिया है। इस पर मंथन भी शुरू हो गया है। सूत्रों के मुताबिक पंचायत चुनाव 20 सितंबर से 20 अक्टूबर के बीच तीन चरणों में होंगे। शासन द्वारा 12 सितंबर को चुनाव कार्यक्रम फाइनल कर इस बारे में आयोग को सूचित किया जाएगा। इसके बाद 15 सितंबर को आयोग चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर देगा और इसी दिन से राज्य में पंचायत चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी।

उत्तराखंड के 12 जिलों में ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के कुल 66446 पदों के लिए चुनाव होने हैं। इन पदों के लिए 31 अगस्त को आरक्षण का निर्धारण करने के बाद पंचायतीराज निदेशालय ने इसकी सूचना राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दी थी। त्रिस्तरीय पंचायतों के लिए मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण पहले ही हो चुका है। निर्वाचन के लिए यह दोनों प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद आयोग ने भी चुनाव का प्रस्तावित कार्यक्रम राज्य सरकार को भेज दिया है।

शासन में पंचायत चुनाव के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर गहनता से मंथन चल रहा है। सूत्रों ने बताया कि पंचायत चुनाव तीन चरणों में होंगे। 20 सितंबर को नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ हो सकती है। उधर, शासन में एक वरिष्ठ अधिकारी ने आयोग से पंचायत चुनाव का प्रस्तावित कार्यक्रम मिलने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि अभी कार्यक्रम फाइनल नहीं हुआ है। सरकार से विमर्श के बाद तारीखें आगे पीछे हो सकती हैं। हालांकि, चुनाव कार्यक्रम के संबंध में अंतिम निर्णय राज्य निर्वाचन आयोग ही लेगा।

विधायी को भेजी अध्यादेश संबंधी फाइल 

पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच पंचायतीराज मंत्रालय ने उस अध्यादेश का प्रस्ताव विधायी को भेज दिया है, जिसमें सहकारी समितियों के सदस्यों को पंचायत चुनाव लड़ने की छूट दी गई है। असल में राज्य के संशोधित पंचायतीराज एक्ट में यह प्रावधान कर दिया गया था कि सहकारी समितियों के सभापति, उपसभापति, प्रबंध समिति और सदस्य पंचायत चुनाव में भाग नहीं ले पाएंगे।

बाद में पता चला कि सहकारिता एक्ट में सहकारी समितियों के सदस्यों को पंचायत चुनाव लड़ने की छूट है। यह त्रुटि संज्ञान में आने के बाद सरकार ने अध्यादेश के जरिये इस त्रुटि को दूर कराने का निश्चय किया। कैबिनेट ने हाल में अध्यादेश को मंजूरी दी थी। इसके तहत अब सहकारी समितियों के सभापति, उपसभापति व प्रबंध समिति के सदस्यों को छोड़ सहकारी समितियों के सदस्य चुनाव लड़ सकते हैं। अब इसे लेकर चल रही कसरत के तहत फाइल विधायी को भेज दी गई है। सरकार की कोशिश है कि पंचायत चुनाव का कार्यक्रम घोषित होने से पहले अध्यादेश का नोटिफिकेशन जारी हो जाए।

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