आंगन में आई पोषणबाड़ी तो दूर भागा कुपोषण

 मध्यप्रदेश का श्योपुर जिला कुपोषण के लिए पूरे देश में कुख्यात है। अच्छी खबर यह है कि यहां घरों में विकसित की गई पोषणबाड़ियों ने कुपोषण पर प्रहार करना शुरू कर दिया है। अच्छे परिणाम देख अब राज्य सरकार पूरे प्रदेश में पोषणबाड़ी योजना लागू करने जा रही है। श्योपुर में सहरिया जनजाति के परिवारों की संख्या भी अच्छी खासी है। पिछड़ेपन और संसाधनहीनता के कारण कुपोषण यहां घर कर गया। सरकारी जतन उतने सफल परिणाम नहीं दे पाए जो, गांधी सेवा आश्रम की पोषणबाड़ी ने कर दिखाया।

समाजसेवी संस्था गांधी सेवा आश्रम ने सहरिया परिवारों के आंगन में पोषणबाड़ी लगवाई, जिसमें उगे फल- सब्जियों के सेवन से हजारों महिलाएं एनीमिया रोग (रक्ताल्पता) और बच्चे कुपोषण की चपेट से बाहर आ गए। इस प्रयोग को मप्र सरकार पुरस्कृत कर चुकी है। गांधी सेवा आश्रम ने साल 2016 में कराहल और श्योपुर ब्लॉक की 50 ग्राम पंचायतों के 4203 सहरिया आदिवासी परिवारों के आंगन में पोषणबाड़ी लगवाई।

हर सहरिया परिवार को सात- सात फलों (अनार, सीताफल, अमरूद, सहजन, आंवला, नींबू और पपीता) के पौधों अलावा मैथी, पालक, धनिया, मटर, मूली आदि सब्जियों के बीज दिए गए। अधिकांश फल और सब्जियों के पौधों ने 06 से 10 महीने में पैदावार देना शुरू कर दिया। घरों के आंगन में सब्जी-फल होने लगे, इसलिए इन्हें कोई चाहकर भी नहीं बेच सकता था और खुद के आहार में उपयोग करने लगे। भोजन में पोषण बढ़ा और सहरिया परिवारों की महिलाओं को एनीमिया व बच्चों को कुपोषण से मुक्ति मिलना शुरू हुआ।

पूरे प्रदेश में लागू होगा प्रोजेक्ट

गांधी सेवा आश्रम के इस प्रोजेक्ट को महिला एवं बाल विकास विभाग ने प्रदेश में लागू करने का निर्णय लिया है। इसे पोषण वाटिका या किचिन गार्डन के नाम से सभी जिलों में लागू किया जाना है। सरकार से मिले प्रोत्साहन से गदगद गांधी सेवा आश्रम ने इस साल विजयपुर व कराहल में 03 हजार परिवारों में भी पोषणबाड़ी विकसित करने का निर्णय लिया है।

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