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2009 के बाद 2017 में रहा RIL का दूसरा सबसे बढ़िया प्रदर्शन

अब तक 71% ऊपर2009 के बाद 2017 में रहा RIL का दूसरा सबसे बढ़िया प्रदर्शन

कंपनी का शेयर इस साल अब तक 71 पर्सेंट चढ़ चुका है, जबकि 2009 में इसने 77 पर्सेंट का जोरदार रिटर्न दिया था

 RIL को लेकर मार्केट सेंटीमेंट तब से पॉजिटिव होने लगा, जब रिलायंस जियो ने सब्सक्राइबर्स से पैसे लेना शुरू कर दिया

2008-2014 में कंपनी का परफॉर्मेंस बाजार से खासा कमजोर रहा था, मार्जिन में गिरावट आने से प्रॉफिट घटा हुआ था

बीएसई के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स को 2017 में नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम योगदान देने वाली देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 2009 के बाद सबसे ज्यादा रिटर्न दे सकते हैं। इसमें कंपनी के टेलीकॉम बिजनेस रिलायंस जियो का बड़ा हाथ होगा, जिसको उसने पिछले साल सितंबर में लॉन्च किया था। कंपनी का शेयर इस साल अब तक 71 पर्सेंट चढ़ चुका है, जबकि 2009 में इसने 77 पर्सेंट का जोरदार रिटर्न दिया था।

कंपनी के शेयरों को लेकर बाजार का सेंटीमेंट तब से पॉजिटिव होने लगा जब रिलायंस जियो ने अपनी सर्विसेज के लिए सब्सक्राइबर्स से पैसे लेना शुरू कर दिया। इसके चलते टेलीकॉम बाजार में कंसॉलिडेशन का दौर शुरू हो गया। 2008 से 2014 के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों का परफॉर्मेंस बाजार के मुकाबले खासा कमजोर रहा था। उस दौरान मार्जिन में कमी आने से कंपनी का प्रॉफिट घट गया था। कंपनी ने नए एनर्जी प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाना शुरू कर दिया था इसलिए उसका कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ गया था। कंपनी जियो के जरिए टेलीकॉम इंडस्ट्री में बहुत बड़ा दांव लगा रही थी।

इडलवाइज सिक्योरिटीज के जाल ईरानी कंपनी के शेयरों पर बुलिश बने हुए हैं। ईरानी ने ईटी नाऊ को दिए इंटरव्यू में कहा था, ‘RIL आनेवाले समय में हेल्दी रिटर्न दे सकती है। कंपनी के शेयर से सालाना आधार पर 70 से 80 पर्सेंट तक रिटर्न की उम्मीद करना सच्चाई से मुंह चुराने जैसा होगा। लेकिन कंपनी के फंडामेंटल्स मजबूत बने रहेंगे।’ उन्होंने कहा था कि कंपनी के शेयरों का दाम वाजिब लेवल पर है और इसमें 1.5 गुना प्राइस टु बुक वैल्यू पर ट्रेड हो रहा है जो ज्यादा नहीं है।

IIFL के एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट-मार्केट्स और कॉरपोरेट अफेयर्स संजीव भसीन का कहना है कि 2018 के अंत तक शेयर 1250 रुपये के लेवल तक जा सकता है। भसीन कहते हैं, ‘तेजी की बड़ी वजह जियो को हासिल हुई बाजार हिस्सेदारी है। क्रूड के दाम में बढ़ोतरी भी कंपनी के लिए पॉजिटिव है क्योंकि इससे उसके ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन में बढ़ोतरी होगी। जियो के चलते शेयर में जितनी तेजी आनी थी, उतनी कमोबेश आ चुकी है और जब कंपनी को एनर्जी बिजनेस बेहतर रिटर्न मिलता रहेगा, उसके शेयरों में मजबूती बनी रहेगी।’

लेकिन जेफ्रीज ने रिलायंस इंडस्ट्रीज पर बेयरिश दांव लगाया है। ब्रोकरेज फर्म ने कंपनी के शेयर को 790 रुपये के टारगेट के साथ अंडरपरफॉर्म रेटिंग दी है। उसका कहना है, ‘रिलायंस इंडस्ट्रीज का इबिट्डा 2022-23 तक भले ही डबल होकर 20 अरब डॉलर तक पहुंच जाए लेकिन यह कमोबेश 123 अरब डॉलर की एंटरप्राइज वैल्यू में एडजस्ट हो चुका है। दरअसल ईपीएस में बढ़ोतरी के बावजूद रिटर्न रेशियो सामान्य बना रह सकता है लेकिन वर्किंग कैपिटल की जरूरतों के मद्देनजर फ्री कैश फ्लो उम्मीद से कम रह सकता है।’

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