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करगिल शहीद की विधवा की मौत, अस्पताल मांगता रहा आधार कार्ड

हरियाणा के सोनीपत जिले में आधार कार्ड और कागजी कार्रवाई के चक्कर में करगिल शहीद की पत्नी की जान चली गई। मृत महिला शकुंतला देवी कारगिल युद्ध में शहीद हवलदार लक्ष्मण दास की पत्नी थीं जो 9 जून 1999 को अपनी जाट रेजिमेंट के साथियों के साथ दुश्मन से लोहा लेते वक्त शहीद हो गए थे।करगिल शहीद की विधवा की मौत, अस्पताल मांगता रहा आधार कार्ड

 शकुंतला देवी पिछले कई दिनों से बीमार थी और उनका बेटा गले के कैंसर के कारण सोनीपत के ट्यूलिप हॉस्पिटल में भर्ती कराना चाहता था। इसके लिए शकुंतला देवी को सेना के स्थानीय कार्यालय से रेफर भी किया गया था लेकिन मौके पर आधार कार्ड मौजूद ना होने के कारण अस्पताल ने उन्हें भर्ती करने से मना कर दिया। 

जानकारी के मुताबिक शकुंतला देवी हार्ट की भी मरीज थीं और पिछले कई दिनों से बीमार थीं। इस बीच जब उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई तो उनका बेटा पवन उन्हें लेकर कई अस्पताल में भटकता रहा। अंतत: उसने सेना के स्थानीय कार्यालय में अपनी मां के बीमार होने की जानकारी दी जहां से उन्हें ट्यूलिप हॉस्पिटल के लिए रेफर कर दिया गया। 

नहीं माने डॉक्टर 
इसके बाद पवन अपनी मां के साथ ट्यूलिप अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उनसे शकुंतला देवी के आधार कार्ड की मांग की। मौके पर पवन के पास उनकी मां का आधार कार्ड नहीं था इस कारण उन्होंने किसी तरह वॉट्सऐप पर इसकी फोटो मंगाकर अस्पताल के डॉक्टरों को दिखाई। उन्होंने आधार की मूल प्रति को जमा करने का वादा भी किया लेकिन डॉक्टरों ने उनकी नहीं सुनी। 

कुछ देर बाद अस्पताल के प्रबंधन की एक महिला ने पवन से कहा कि यदि उनके पास आधार कार्ड ना हो तो वह अपनी मां को तुरंत अस्पताल से ले जाएं। इस पर पवन ने रोते हुए अस्पताल के डॉक्टरों को यह भी बताया कि उनकी मां रगिल शहीद की विधवा हैं लेकिन इसका भी अस्पताल पर इसका कोई असर नहीं हुआ।

 दर्द से तड़पती रहीं शकुंतला 
इन सब के बीच शकुंतला देवी दर्द से तड़पती रहीं और करीब डेढ़ घंटे तक सारा विवाद चलता रहा। इसके बाद पवन मां को लेकर फिर सेना के स्थानीय कार्यालय लौट आए जहां उन्होंने किसी और अस्पताल के लिये रेफरल लेटर लेने की प्रक्रिया शुरू की। अभी पवन शकुंतला देवी को किसी अन्य अस्पताल में ले जा पाते इससे पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। 

हालांकि इस पूरे आरोप पर ट्यूलिप अस्पताल के चिकित्सक अभिमन्यु कुमार ने कहा कि हमने शकुंतला देवी का इमरजेंसी वॉर्ड में इलाज शुरू कराया था जिसकी सीसीटीवी फुटेज भी मौजूद है। अस्पताल में मरीजों को उनकी गंभीरता के अनुसार यथाशीघ्र भर्ती कराने की कोशिश भी होती है, लेकिन शकुंतला देवी को भर्ती कराने के बाद उनके परिजन उन्हें कहीं दूसरी जगह ले गए जहां उनकी मौत हो गई। 

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