भारतीय सेना इस तरह पाकिस्तान की दुष्ट सेना को करा सकती है चुप

23 दिसंबर को एक अफसर और सिख रेजिमेंट के 3 जवानों को पाकिस्तानी सेना ने घात लगाकर एलओसी के नजदीक रजौरी सेक्टर में शहीद कर दिया। सैनिकों के पार्थिक शरीर को कथित तौर पर विकृत भी किया गया था। भारतीय सेना ने भी पाकिस्तान की इस कायरता का माकूल जवाब दिया।

पाकिस्तान की दुष्ट सेना इससे पहले भी कई बार भारतीय सैनिकों के पार्थिव शरीर को क्षत-विक्षत कर चुकी है। पाकिस्तानी सेना की ये कायराना हरकतें जिनेवा कन्वेंशन के प्रवाधानों के भी खिलाफ हैं। 

जम्मू और कश्मीर में पिछले 3 दशकों से भी ज्यादा वक्त से पाकिस्तान गंभीर उकसावे वाली हरकतें करता रहा है लेकिन भारतीय सेना रणनीतिक संयम दिखाती रही है। पठानकोट में इंडियन एयर फोर्स के एयरबेस पर आतंकी हमले और उड़ी में आर्मी कैंप पर हमले के बाद भारतीय सेना ने सितंबर 2016 में एलओसी के पार सर्जिकल स्ट्राइककर कई आतंकी कैंपों को तबाह किया था। उसके बाद से ही भारत ने पॉलिसी में बदलाव किया है और रणनीतिक संयम के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर आक्रामक जवाब की रणनीति भी अपनाई है। इस बदली हुई पॉलिसी का उद्देश्य सीमापार आतंकवाद को स्टेट पॉलिसी के तौर पर इस्तेमाल करने वाले पाकिस्तान को सबक सिखाना था। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद आतंकी घुसपैठ की कोशिशों में बढ़ोतरी हुई है और 2003 में हुए संघर्षविराम समझौते का भी पाकिस्तान की तरफ से बार-बार उल्लंघन की घटनाएं हुई हैं। यह दिखाता है कि नई पॉलिसी भी पर्याप्त रूप से कारगर नहीं हुई है। ऐसे में कश्मीर में पाकिस्तान के छद्म युद्ध को काउंटर करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक रणनीति की जरूरत है। 

राजनीतिक उद्देश्य यह होना चाहिए कि पाकिस्तान कश्मीर में अपने छद्म युद्ध की कीमत चुकाए। भारतीय कूटनीति का उद्देश्य पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अलग-थलग करना और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा उसे एक आतंकी राष्ट्र घोषित कराना होना चाहिए। भारत को इस दिशा में पहला कदम उठाना चाहिए और खुद ही पाकिस्तान को आतंक राष्ट्र घोषित करना चाहिए। 

इनके अलावा, पाकिस्तान पर आर्थिक चोट करने के लिए भी कदम उठाने चाहिए। उसके खिलाफ एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों की कार्यवाही शुरू करनी चाहिए। भारत रक्षा उत्पादों का सबसे बड़ा खरीदार है और उसे इसका भी फायदा उठाना चाहिए। भारत को चाहिए कि वह डिफेंस से जुड़ी जिन बहुराष्ट्रीय कंपनियों से हथियार और रक्षा उपकरण खरीदता है, उन कंपनियों से कहे कि वे इन्हें पाकिस्तान को आपूर्ति करने से बचें। सैन्य उद्देश्य यह होना चाहिए कि भारतीय सरजमीं पर हुए पाकिस्तान की भूमिका वाले हर आतंकी कृत्य का एलओसी पर तैनात पाकिस्तानी सेना को दंड भुगतना पड़े। हालांकि सैन्य बदले की कार्रवाई को बहुत ही सावधानी से अंजाम दिया जाए ताकि वह बड़े पैमाने पर संघर्ष का रूप न ले सके क्योंकि यह भारत के हितों में नहीं होगा। 

सैन्य कार्रवाई में तोपों से हमला भी शामिल होना चाहिए जो पाकिस्तानी सेना के अग्रिम मोर्चे पर बने बंकरों को तबाह कर सके। इसके अलावा पाकिस्तानी सेना के ब्रिगेड और बटैलियन मुख्यालय, कम्युनिकेशन और लॉजिस्टिक्स इनफ्रस्ट्रक्चर, मुख्य पुलों आदि को निशाना बनाया जाए। जिस भी पाकिस्तानी पोस्ट से घुसपैठ की घटनाएं होती हैं उन्हें खत्म किया जाना चाहिए। 

आतंकियों के खात्मे के लिए स्पेशल फोर्सेज के जरिए एलओसी के पार कोवर्ट ऑपरेशन भी किए जाने चाहिए। जब पाकिस्तानी सेना चोट महसूस करने लगेगी तो उसे महसूस होगा कि भारत के खिलाफ उसकी साजिशें नाकाम हैं। भारत की ऐसी कार्रवाइयों से पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर पर अपने दावे को तो नहीं छोड़ेगा लेकिन वह इस विवाद के शांतिपूर्ण हल के लिए वार्ता की मेज पर आने को मजबूर होगा। 

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