Friday , November 27 2020

तीन तलाक: प्रस्तावित कानून में सजा वाले प्रावधानों के विरोध में विपक्ष

तीन तलाक को आपराधिक घोषित करने के केंद्र के फैसले का जहां मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तीखा विरोध कर रहा है, वहीं लेफ्ट, कांग्रेस, टीएमसी और एनसीपी समेत विपक्ष का एक बड़ा तबका भी इसके विरोध में है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में 3 तलाक को अमान्य और असंवैधानिक घोषित किया था जिसके बाद सरकार नया कानून बनाने जा रही है। इससे जुड़ा बिल गुरुवार को संसद में पेश किया जाएगा।

द मुस्लिम विमिन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरेज) बिल में तीन तलाक की पीड़ितों को मुआवजे का भी प्रावधान है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड समेत तमाम मुस्लिम संगठन इस बिल का विरोध कर रहे हैं। सरकार इस बिल को संसद में पेश करने को लेकर अडिग है हालांकि बहुत मुमकिन है कि इस बिल को संसदीय समिति को सौंप दिया जाएगा। 

बिल को लोकसभा में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद गुरुवार को पेश करेंगे। इस बिल को गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अगुआई में एक अंतरमंत्रालयी समूह ने तैयार किया है। इसके तहत किसी भी तरह से दिया गया इन्सटैंट ट्रिपल तलाक (बोलकर या लिखकर या ईमेल, एसएमएस, वॉट्सऐप आदि के जरिए) ‘गैरकानूनी और अमान्य’ होगा और पति को 3 साल तक जेल की सजा हो सकती है। 

इस बिल को सुप्रीम कोर्ट के 22 अगस्त के फैसले के बाद तैयार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त को तीन तलाक को गैरकानूनी घोषित किया था। बिल के मसौदे को 1 दिसंबर को राज्यों को विचार के लिए भेजा गया था और उनसे 10 दिसंबर तक जवाब मांगा गया था। हालांकि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने रविवार को प्रस्तावित बिल को महिला विरोधी बताते हुए खारिज कर दिया था। AIMPLB के सेक्रटरी मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा कि प्रस्तावित बिल ‘महिला विरोधी’ है। उन्होंने कहा कि बोर्ड औपचारिक तौर पर पीएम को खत लिखेगा और बिल की समीक्षा की मांग करेगा। प्रस्तावित बिल का कांग्रेस, एनसीपी और सीपीएम भी तमाम मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे हैं।  

टीएमसी जहां तीन तलाक पर बैन के ही खिलाफ है, वहीं कांग्रेस, एनसीपी और लेफ्ट जैसे दूसरे दल सुप्रीम कोर्ट के फैसले का तो स्वागत कर चुके हैं लेकिन प्रस्तावित कानून में सजा के प्रावधानों का विरोध कर रहे हैं। 

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि केंद्र सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आड़ में एक ऐसी चीज को आपराधिक बनाना चाहता है जिसकी अभी हाल तक इजाजत थी। जहां ज्यादातर पार्टियां यह कह रही हैं कि वे अभी बिल का अध्ययन कर रही हैं, वहीं सीपीएम सांसद मोहम्मद सलीम कह चुके हैं कि सजा का प्रावधान चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि बिल को संसद की किसी सर्वदलीय समिति में भेजा जाना चाहिए जहां इसके सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। 

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