Thursday , November 26 2020

मकर सक्रांति के बाद होगी भाजपा राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक, बनेगी आगामी चुनावों की रणनीति

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मकर सक्रांति के बाद पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है। बैठक में गुजरात और हिमाचल के जीत की खुशी साझा करने के साथ आगामी चुनावी राज्यों की रणनीति भी बनेगी। गुजरात और हिमाचल प्रदेश में  भाजपा को जीत दिलाने के बाद शाह की नजरें अब कर्नाटक, त्रिपुरा और मेघालय के चुनाव पर केंद्रीत हो गई हैं। 

आगामी चुनावों की रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए उन्होंने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। वैसे भाजपा संविधान के अनुसार पार्टी के राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक हर तीन माह के बाद होनी आवश्यक है। मगर चुनावी व्यस्तता के वजह से अबकी बार की बैठक थोड़ी विलंब से हो रही है। बताया जा रहा है कि मकर सक्रांति के तुरंत बाद भाजपा के राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक होगी। वैसे बैठक की तिथि और स्थान पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। 

लेकिन 20 से 25 जनवरी के बीच बैठक होनी निश्चित हुई है। बड़े नेताओं की सुविधा के लिहाज से बैठक की तिथि एक-दो दिनों में तय कर दी जाएगी। बैठक के आयोजन स्थल में मुख्य संभावना दिल्ली की ही है। चुनावी राज्यों में भी बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव शाह के पास आया है। अमित शाह ने सोमवार को भाजपा महासचिवों के साथ बैठक कर उनसे पार्टी के आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा की। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यसमिति बैठक के अलावा उन्होंने अपने महासचिवों संग भाजपा के भावी कार्यक्रमों पर चर्चा की। 

शाह की बैठक के बाद पार्टी के एक महासचिव ने बताया कि बैठक में कई स्थानों के प्रस्ताव आए। लेकिन 20 जनवरी के आसपास होने वाली कार्यसमिति बैठक के दिल्ली में ही आयोजित होने के आसार हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि दक्षिण के राज्यों में बैठक आयोजित करने के लिए प्रमुख स्थान कर्नाटक है। लेकिन यहां के कार्यकर्ता पहले से ही चुनावी मोड़ में आ गए हैं। रही बात त्रिपुरा और मेघालय की तो यहां बैठक करने लायक व्यवस्था उतनी सुदृढ़ है। इसलिए इस दफे की कार्यसमिति बैठक के दिल्ली में ही संपन्न होने के आसार हैं। एक-दो दिनों में स्थान और तिथि को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। 

पार्टी के नए मुख्यालय का भी होना है उद्घाटन

दिल्ली में कार्यसमिति बैठक आयोजित करने की मुख्य वजह यह भी है कि भाजपा को अपने नए मुख्यालय का उद्घाटन करना है। पार्टी का नया मुख्यालय दीन दयाल उपाध्याय मार्ग पर बनकर तैयार हो गया है। लोकसभा का अगला चुनाव पार्टी अपने इसी नए मुख्यालय से लड़ेगी। इसलिए एक तर्क यह भी है कि दिल्ली में कार्यसमिति बैठक के अवसर पर कार्यालय का उद्घाटन भी हो जाएगा। अन्यथा उसके लिए सबको अलग से बुलाने का झंझट बाकी रहेगा। नए मुख्यालय के उदघाटन के बाद भाजपा का मुख्य मुख्यालय बदलकर दीन दयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थानांतरित हो जाएगा। 

गुजरात और हिमाचल की जीत साझा करने के साथ बनेगी चुनावी राज्यों की रणनीति

दरअसल भाजपा रणनीतिकार गुजरात और हिमाचल में मिली पार्टी की जीत के जश्न को लंबा बरकरार रखना चाहते हैं। ताकि आगामी राज्यों में पार्टी को इसका मनोवैज्ञानिक लाभ मिल सके। यही वजह है कि गुजरात और हिमाचल चुनाव के बाद रविवार को आए उपचुनाव के नतीजों तक को पार्टी ने जोर-शोर से प्रचारित किया है। अब कार्यसमिति बैठक में गुजरात और हिमाचल में मिली जीत का गुणगान कर भाजपा नेता दोनों राज्यों की जीत के जश्र को देश के कार्यकर्ताओं के बीच साझा करेंगे। ताकि उनका मनोबल बढ़ा रहे। इसके अलावा कर्नाटक, त्रिपुरा और मेघालय के चुनाव की रणनीति भी बनेगी। 

पीएम मोदी के संकल्पों पर रहेगा जोर 

आगामी विधानसभा चुनाव वाले राज्यों के अलावा भाजपा पूरे देश में अपने दल के पक्ष में माहौल बनाए रखना चाहती है। ताकि लोकसभा चुनाव 2019 में उसके सामने कोई कठिनाई न पेश हो। इस कवायद में पीएम मोदी के संकल्पों पर पार्टी का विशेष जोर रहेगा। पार्टी ने पहले से ही संकल्प से सिद्धि अभियान का नारा बुलंद कर दिया है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इस अभियान पर आगे की रणनीति बनाकर कार्यकर्ताओं को दोबारा से जनता के बीच उतारने की तैयारी कर रहे हैं। संकल्प से सिद्धि के अलावा पीएम मोदी के न्यू इंडिय़ा संकल्प को भी भाजपा कार्यकर्ता आगामी दिनों में विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए जनता के बीच लेकर जाएंगे। सूत्र बताते हैं कि इन सारे आयोजनों की रणनीति जनवरी में होने वाली राष्ट्रीय कार्यसमिति बैठक में ही तय होगी। 

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