Tuesday , November 24 2020

दाढ़ी रखने पर NCC कैम्प से निकाले गए जामिया के 10 स्टूडेंट्स

जामिया मिलिया इस्लामियायूनिवर्सिटी के 10 छात्रों को कथित रूप से सिर्फ इसलिए दिल्ली के रोहिणी स्थित एनसीसी मुख्यालय छोड़ने कह दिया गया क्योंकि उनकी दाढ़ी थी। ये स्टूडेंट्स 6 दिन के कैम्प के लिए मुख्यालय पहुंचे थे। उन्हें बटालियन हवलदार मेजर ने 19 दिसंबर को बताया था कि उन्हें अपनी दाढ़ी हटानी होगी।

यूपी के बिजनौर के रहने वाले एलएलबी पहले वर्ष के स्टूडंट दिलशाद अहमद ने कहा, ‘हमने आवेदन दिया था कि हम धार्मिक वजहों से दाढ़ी रखते हैं और हम पिछले दो सालों से अधिक समय से एनसीसी का हिस्सा हैं और हमसे कभी भी दाढ़ी हटाने को नहीं कहा गया।’ दिलशाद ने आगे बताया, ‘कैम्प के छठे दिन हमें जबरन हटने को कह दिया गया और हमारे सामान को हटा दिया गया। हम भी किसी दिन सेना में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन इस तरह का रवैया तकलीफदेह है।’ 

एक और कैडेट मोहम्मद हमजा ने बताया कि वह तीन सालों से एनसीसी का हिस्सा हैं और वह आर्मी अटैचमेंट ट्रेनिंग कैम्प भी जा चुके हैं, लेकिन उन्हें कभी भी दाढ़ी रखने पर हटाया नहीं गया। एनसीसी के एक पूर्व अधिकारी ने बताया कि कैम्प में दाढ़ी रखने की मंजूरी नहीं है और इसको लेकर हाई कोर्ट तथा रक्षा मंत्रालय की तरफ से भी आदेश मिले हुए हैं। 

एक और छात्र अनवर आलम ने बताया कि यह हमारे लिए अपमानित होने जैसा है। हमें पुलिस ऐक्शन की भी धमकी दी गई। अनवर ने बताया कि जो अधिकारी छात्रों के साथ थे उन्होंने भी मदद नहीं की। दिलशाद ने कहा, ‘एनसीसी में ऐसा कोई नियम नहीं है जो यह कहता हो कि दाढ़ी रखना अनुशासनहीनता है।’ 

अनवर ने बताया, ‘हम बैरक में लौट आए, हम कमांडिंग ऑफिसर से मिलने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन हमारी किसी से मुलाकात नहीं हो पाई। देर रात हमें कैम्पस से हटने कह दिया गया और कहा गया कि हम नहीं गए तो पुलिस कार्रवाई की जाएगी।’ 

इस मामले में जब हमारे सहयोगी ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने जब कमांडिंग ऑफिसर एस.बी.एस यादव से पूछा तो उन्होंने प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। स्टूडेंट्स के साथ मौजूद अधिकारी का कहना है कि वह यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर को घटना की रिपोर्ट सौंपेंगे। यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक बयान में कहा है कि वह मामले की जांच कर पता लगाएगी कि कैम्प में क्या हुआ था। जामिया की मीडिया संयोजक साइमा सईद ने कहा कि हमारा पहला उद्देश्य हमारे स्टूडेंट्स को सहयोग और कानूनी रूप से मदद देना है। 

बता दें कि इससे पहले 2013 में बेंगलुरु में 7 कॉलेज स्टूडेंट्स ने एनसीसी के फैसले खिलाफ कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उनका आरोप था कि एनसीसी ने दाढ़ी रखने पर उन्हें परीक्षा में बैठने नहीं दिया। 
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