Wednesday , March 3 2021

2G मामले पर आ रही है राजा की किताब, उठ सकते हैं नए विवाद

पूर्व टेलिकॉम मंत्री ए. राजा 2जी केस पर अपनी किताब छपवाने को तैयार हैं। इससे इस मामले में राजनीतिक विवाद का एक और दौर शुरू हो सकता है। राजा को पिछले हफ्ते 2जी घोटाले में बरी किया गया था। इस किताब का प्रकाशन पहले टाल दिया गया था। राजा ने पहले कहा था कि इस किताब में उनकी गिरफ्तारी और ट्रायल की वजहों के बारे में खुलासा किया जाएगा। 

 मामले से वाकिफ एक शख्स ने बताया कि बेहद आक्रामक अंदाज में लिखी गई इस किताब का विमोचन 20 जनवरी तक किया जा सकता है। उनके मुताबिक, इस किताब में 200 से भी ज्यादा पन्नों में 2जी की अहम घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा पेश किया गया है। इस केस के चलते राजा 15 महीने तिहाड़ जेल में रहे। उन्होंने 2015 में एक इंटरव्यू में कहा था कि यह किताब जेल में बिताए गए उनके दिनों और उन्हें जेल क्यों भेजा गया, उसकी वजहों के बारे में होगी। उनका कहना था कि एकाधिकार खत्म करने के लिए उन्हें परेशान किया गया। 
मामले से वाकिफ सूत्रों के मुताबिक, इस किताब को पेंग्विन ने प्रकाशित किया है और इसमें केस के सिलसिले में अहम सूचनाएं होंगी। एक सूत्र ने बताया, ‘राजा एक राजनेता हैं और इतने बड़े केस में उनके राजनीतिक उतार-चढ़ाव का जिक्र निश्चित तौर पर उस किताब में होगा, जिन्होंने काफी मेहनत से उसे लिखा है। इसमें उनके संघर्ष का जिक्र होगा। उन्होंने जिन मुश्किलों का सामना किया है, उनके राजनीतिक पतन और जिस भरोसे के साथ उन्होंने मुकदमे लड़े, उन चीजों का जिक्र होगा।’ राजा ने पिछले हफ्ते अपनी रिहाई के बाद किताब पर आगे बढ़ने का फैसला किया। 
राजा के एक और सहयोगी ने बताया, ‘पहले केस में अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद किताब के लोकार्पण का फैसला किया गया। हालांकि, हमने बाद में इसे टाल दिया, क्योंकि हम ऐसी किसी भी चीज में नहीं फंसना चाहते थे, जिसे कोर्ट या पब्लिक ऑपिनियन को प्रभावित करने वाला मान लिया जाए।’ 
किताब का लोकार्पण वैसी अपीलों से नहीं रुकेगा, जो सीबीआई की तरफ से तैयार की जा रही हैं। एक सूत्र के मुताबिक, ‘यह किताब वैसे लोगों के लिए प्रेरणादायी होगी, जो मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।’ राजा की किताब में पिछली यूपीए सरकार के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अन्य नेताओं के साथ उनके (राजा) के बीच हुए पत्राचार का जिक्र होगा। राजा पर स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री को गुमराह करने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, विशेष अदालत को इन आरोपों में कोई सबूत नहीं मिला और उसने सिंह को गुमराह करने के मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के दो अधिकारियों को दोषी ठहराया।

 इस किताब में कंट्रोलर ऐंड ऑडिटर जनरल (सीएजी) की रिपोर्ट की भी आलोचना की गई है, जिसमें 2008 में लाइसेंस जारी करने के मामले में 1.76 लाख करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान जताया था। एक सूत्र ने बताया, ‘उन्होंने तकरीबन 200 पन्नों में राजनीतिक मायनों और काफी रेकॉर्ड के साथ केस का सार देने की कोशिश की है।’ मामले से वाकिफ एक शख्स ने बताया कि किताब में इस बात को लेकर भी जिक्र होगा कि किस तरह से लॉ ग्रेजुएट राजा ने अपनी टीम के साथ केस में अपनी कानूनी जानकारी का इस्तेमाल किया। 

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