‘सेक्स जेल’ : कहती हैं छुड़ाई गईं लड़कियां, ‘हमारे लिए बाबा ही सबकुछ’

विजय विहार के आध्यात्मिक आश्रम से छुड़ाई गईं नाबालिग लड़कियों का कहना है कि उनके लिए सब कुछ उनके बाबा हैं। बाबा की ओर से दी गई शिक्षा के आधार पर ही पूरी जिंदगी गुजारेंगी। बाहर का खाना, पहनना और किसी से बातें करना, शिक्षा के खिलाफ होगा इसलिए वह न तो चाइल्ड वेलफेयर होम का खाना खा रही हैं, और न ही यूनिफॉर्म से अलग कपड़े पहनने के लिए तैयार हैं।

 पिछले दिनों विजय विहार आश्रम से 41 नाबालिग लड़कियों का रेस्क्यू कर अलीपुर के मिंडा बाल गृह में रखा गया है। शनिवार को बाल गृह से लड़कियों के कपड़ा लेने के लिए आश्रम पहुंची सीनियर काउंसलर मधु ने बताया कि सभी लड़कियां मेड का बना हुआ खाना खाने के लिए तैयार नहीं है। पहले दिन तो किसी ने खाना ही नहीं खाया। लड़कियों का कहना है कि किसी के हाथ का बना खाना अगर खा लिया तो आध्यात्मिक शिक्षा के खिलाफ होगा, इसे अन्नदोष माना जाएगा इसलिए वह खुद ही अपने हाथों से खाना बनाकर ही खा रही हैं। आश्रम से मिली यूनिफॉर्म के अलावा दूसरे कपड़े भी पहनने से इनकार कर दिया है इसलिए बाल गृह से एक टीम लड़कियों के कपड़े विजय विहार में बाबा के आश्रम से लेकर आई। 
बंद कमरे में ही रहना चाहती हैं लड़कियां 
बाल गृह में लड़कियां केवल बंद कमरे में ही रहना चाहती हैं। काउंसलर के लाख समझाने के बाद भी लड़कियां खुले पार्क में घूमना नहीं चाहती हैं। ठंड के मौसम के बावजूद धूप में रहना पसंद नहीं करतीं। इस सिलसिले में जानकारी लेने पर पता चला कि इन लड़कियों की नजर अन्य बाहरी लोगों पर न पड़े, इसलिए वह बंद कमरे में ही रहना चाहती हैं। लड़कियां केवल आपस में ही बातें करती है। अगर कोई उनके पास चला गया तो वह मुंह ढ़ककर चुपचाप बैठ जाती हैं। आश्रम के बारे में पूछने से कुछ भी नहीं बतातीं। सिर्फ एक बात उनकी जुबान पर है-बाबा ही मेरे लिए सब कुछ हैं। नहीं बदली दिनचर्या 
मिंडा बाल गृह में मौजूद सभी लड़कियों के दिनचर्या में कोई फर्क नहीं आया। सुबह 3 बजे से 5 बजे तक सभी लड़कियां प्रार्थना करने लगती हैं। उस दरम्यान किसी से बात नहीं करती हैं। आंखे बंद कर मन-मन में मुस्कुराती हैं और खुद से बातें करती हैं। लड़कियां आश्रम में जाना चाहती हैं। लड़कियां कहती हैं कि उनका धार्मिक ग्रंथ आश्रम में ही है। वह ग्रंथ का अध्ययन नहीं कर पा रही हैं। जब उनसे कहा गया कि ग्रंथ आपको यहीं उपलब्ध करा दिया जाएगा तो उन्होंने केवल आश्रम से मिले हुए ग्रंथ पढ़ने की बात कही। 

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