हापुस आम पर संकट के ‘बादल’

बीते करीब एक पखवाड़े से कोंकण क्षेत्र के आसमान पर छाए बेमौसम बादलों से हापुस  आमों की फसल पर विपरीत परिणाम पड़ रहा है। इन बादलों की छाया ने हापुस आमों के पेड़ों पर लगने वाले बौर (फूल) कम दिए हैं। इसके चलते फरवरी महीने से थोक बाजार में शुरू होने वाली हापुस आमों की सामान्य आवक कम हो सकती है।

 कोंकण हापुस आम उत्पादक किसानों को इस बात का भी भय है कि मौसम के बदलाव से कहीं उनके आमों के पेड़ों पर लगे फूल और आम के छोटे दाने किसी रोग से ग्रस्त न हो जाएं। कोंकण के हापुस आमों की सर्वश्रेष्ठ किस्म देने वाले रत्नागिरी के देवगड तालुका के किसानों में बेचैनी बढ़ गई है। 
मौसम पर निर्भर है आम की फसल 
यहां के एक किसान विजय पवार सहित कई किसानों  ने बताया कि अगर इस साल मौसम प्रतिकूल नहीं हुआ, तो उम्मीद है कि यह साल उनके लिए बेहतर साबित होगा। 

दक्षिण अफ्रीकी हापुस का खतरा 

सुनने में अजीब लगे, लेकिन सच यह है कि कोंकण क्षेत्र के हापुस आमों को दक्षिणी राज्यों के हापुस के बाद दक्षिण अफ्रीका से भी कड़ी टक्कर मिलने वाली है। इस संदर्भ में थोक फल बाजार के विभिन्न सूत्रों ने बताया कि कुछ व्यापारियों ने दक्षिण अफ्रीका से हापुस आयात करने की मंजूरी केंद्र सरकार से मांगी थी। आयात करने की तैयारी में बैठे व्यापारी शुरू में एक दर्जन से भरी कुल 200 पेटियां आयात करने वाले थे। हालांकिकेंद्र  सरकार ने अनुमति नहीं दी। लेकिन, विदेशी हापुस का खतरा देशी हापुस के उत्पादकों के सिर से पूरी तरह टला नहीं है। केंद्र सरकार ने विदेशी हापुस के आयात को इसलिए मंजूरी दी, क्योंकि दक्षिणी राज्यों से आवक शुरू हो चुकी थी। सूत्रों ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका से अरब के देशों में हापुस का निर्यात किया जाता है। 

दक्षिणी राज्यों से आवक शुरू 
थोक फल व्यापारी संभाजी सुर्वे ने बताया कि वाशी स्थित एपीएमसी थोक फल बाजार में पिछले 3-4 दिन से कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों से हापुस आमों  की आवक शुरू हुई है। वैसे, अभी यह आवक कुछ दर्जन पेटियों तक ही सीमित है। फिलहाल, वाशी के थोक फल बाजार में इनके दाम कोंकण के असली हापुस के दाम से आधे से भी कम हैं। बीते पखवाड़े 2 दिसंबर को कोंकण हापुस आम की पहली 5 दर्जन पेटियां 9 हजार रुपये में बिकी थीं। दक्षिणी राज्यों से आना शुरू हुए हापुस आमों को 300-400 रुपये से लेकर 500-600 रुपये प्रति दर्जन का ही भाव मिल रहा है। पिछले कुछ वर्षों से कोंकण हापुस को दक्षिणी राज्यों (विशेषकर कर्नाटक) से कड़ी टक्कर मिल रही है। एक अन्य व्यापारी कुंदन पाटील ने बताया कि अभी वाशी के थोक बाजार में आ रही हापुस आमों की खेप सीधे-सीधे उच्च वर्ग के ग्राहकों के लिए है। 

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