गुजरात में क्यों कामयाब नहीं हो पा रहा भाजपा का सोशल मीडिया कैंपेन?

2012 के विधानसभा और 2014 के लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया के खेल में बाजी मारने वाली भाजपा का सोशल मीडिया कैंपेन इस बार ठंडा है। इस मामले में कांग्रेस इस बार भारी पड़ रही है। दरअसल सोशल मीडिया पर विकास की कहानी कहने की जगह राहुल गांधी का मजाक उड़ाने वाले वीडियो वायरल करने और उनकी हकीकत सामने आने के बाद से भाजपा बैकफुट पर आ गई है। पार्टी के प्रचार में सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की रणनीति बनाने वाले युवाओं की टीम में भी इस बार हताशा सी दिख रही है। 

पिछले चुनाव में सोशल मीडिया कैंपेन की बदौलत भाजपा की हवा बना देने वाले और मोदी लहर का कमाल दिखाने वाले एक प्रमुख कार्यकर्ता नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि इस बार हमारी टीम में कुछ नया करने को लेकर उत्साह नहीं है। बल्कि हो ये रहा है कि नए रचनात्मक कंटेट तैयार करने की बजाय कॉपी, पेस्ट और फॉरवर्ड करने का ही काम हो रहा है। पिछली बार हमने व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्विटर के कम से कम 500 ऐसे ग्रुप बनाए थे जहां नई-नई सोच के साथ मैसेज, कार्टून और विजुअल्स तैयार किए जाते थे।

फिर इन 500 ग्रुप के एडमिन के अलग ग्रुप बनाए गए थे जो आगे की रणनीति तय करते थे, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं है। इस युवा नेता ने बताया कि इसके लिए पिछली बार भारत रक्षा मंच, नरेंद्र मोदी विचार मंच, वंदेमातरम ग्रुप के साथ-साथ हिंदू सेना, नमो सेना जैसे कई नामों से कई मंच बनाए गए थे। स्वदेशी जागरण मंच, विश्व हिंदू परिषद और संघ से जुड़े तमाम संगठन भी सक्रिय थे, लेकिन इस बार भाजपा मीडिया सेल के लोग ही सोशल मीडिया में तमाम संदेश फॉरवर्ड कर रहे हैं। इसीलिए इनमें कई गलतियां भी हो रही हैं और पार्टी को बदनामी भी उठानी पड़ रही है। 

दूसरी तरफ राजस्थान से जामनगर आए एक युवा कार्यकर्ता पिछले 6 महीने से यहां मोदी एप डाउनलोड करवाने का काम कर रहे हैं। उनका दावा है कि करीब 4 लाख लोगों ने ये ऐप डाउनलोड किया है, लेकिन सोशल मीडिया कैंपेन को लेकर इस कार्यकर्ता में भी ज्यादा उत्साह नहीं है। उनका कहना है कि पार्टी ने हमें सिर्फ मोदी एप डाउनलोड करवाने का काम दिया है, वो मैं कर रहा हूं। अब ये ऐप कौन देख रहा है, कौन नहीं, ये नहीं पता। दूसरी तरफ भाजपा मीडिया सेल ने गुजरात गौरव के नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है जो खास तौर से गुजरात में भाजपा नेताओं के भाषणों और चुनावी कैंपेन से जुड़ी सूचनाएं और खास बातें प्रचारित करता है। कुछेक छोटे-मोटे ग्रुप और बनाए गए हैं, लेकिन उनका कहीं असर नहीं दिखता।

गुजरात में विश्व हिंदू परिषद और प्रवीण तोगड़िया के मोदी से नाराज रहने की वजह से भी ये कैंपेन खास जोर नहीं पकड़ पा रहा है। पिछली बार के कैंपेन में लगे कार्यकर्ताओं में से एक ने बेहद निराशा भरे अंदाज में बताया कि हम अपने फायदे के लिए ये काम नहीं कर रहे थे, लेकिन चुनाव जीतने के बाद इन बड़े नेताओं ने हमारे साथ जो सुलूक किया और हमारी बातों को जिस तरह नजरअंदाज किया, उससे मन खट्टा हो गया है। ये कार्यकर्ता इतने निराश हैं कि साफ कहते हैं कि चाहे जितना जोर लगा लें, इस बार भाजपा की सीटें कम होने जा रही हैं। 

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