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‘परमाणु’ को लेकर काफी उत्साहित हैं जॉन, दिया बड़ा बयान

25 मई को रिलीज़ होने जा रही बॉलीवुड मूवी ‘परमाणु’ को लेकर जॉन अब्राहम काफी ज्यादा उत्साहित हैं. वह कहते हैं कि परमाणु जैसी विषयों पर आगे और भी फिल्में बननी चाहिए. जॉन का मानना है कि 1998 के पोखरण टेस्ट ने इंडिया को रिडिफाइन किया था. इसी कारण पूरी दुनिया में भारत का नाम एक बड़ी ताकत के रूप में उभर कर सामने आया था. इसी मोमेंट के बाद भारत का नाम बढ़-चढ़कर लिया जाने लगा था.25 मई को रिलीज़ होने जा रही बॉलीवुड मूवी 'परमाणु' को लेकर जॉन अब्राहम काफी ज्यादा उत्साहित हैं. वह कहते हैं कि परमाणु जैसी विषयों पर आगे और भी फिल्में बननी चाहिए. जॉन का मानना है कि 1998 के पोखरण टेस्ट ने इंडिया को रिडिफाइन किया था. इसी कारण पूरी दुनिया में भारत का नाम एक बड़ी ताकत के रूप में उभर कर सामने आया था. इसी मोमेंट के बाद भारत का नाम बढ़-चढ़कर लिया जाने लगा था.    जॉन ने बताया कि इस तरह के विषय पर फिल्म इसिलए भी बनना ज़रूरी थी क्योंकि आज भी आधे से ज्यादा भारत के लोग परमाणु का मतलब नहीं जानते. भारत में रह रहे आधे से ज्यादा लोगों को तो यह भी नहीं पता है कि पोखरण में हुआ क्या था. जॉन दावे से कहते हैं कि सिर्फ युवा पीड़ी ही नहीं, 30 से 35 साल तक की उम्र वाले युवाओं को भी इसकी जानकारी नहीं है.    जॉन बताते हैं कि उनकी माँ उस वक़्त बहुत रोइ थी, जब राजीव गाँधी जी का देहांत हुआ था. उस घटना का असर जॉन पर लम्बे समय तक था. यही वह कारण था कि, जॉन ने 'मद्रास कैफ़े' जैसी फिल्म बनाई थी. जॉन ने बताया कि मद्रास कैफ़े के अच्छे इम्प्रैशन की वजह से उन्हें फिल्म के बारे में ज्यादा रिसर्च करने में दिक्कत नहीं हुई.25 मई को रिलीज़ होने जा रही बॉलीवुड मूवी 'परमाणु' को लेकर जॉन अब्राहम काफी ज्यादा उत्साहित हैं. वह कहते हैं कि परमाणु जैसी विषयों पर आगे और भी फिल्में बननी चाहिए. जॉन का मानना है कि 1998 के पोखरण टेस्ट ने इंडिया को रिडिफाइन किया था. इसी कारण पूरी दुनिया में भारत का नाम एक बड़ी ताकत के रूप में उभर कर सामने आया था. इसी मोमेंट के बाद भारत का नाम बढ़-चढ़कर लिया जाने लगा था.    जॉन ने बताया कि इस तरह के विषय पर फिल्म इसिलए भी बनना ज़रूरी थी क्योंकि आज भी आधे से ज्यादा भारत के लोग परमाणु का मतलब नहीं जानते. भारत में रह रहे आधे से ज्यादा लोगों को तो यह भी नहीं पता है कि पोखरण में हुआ क्या था. जॉन दावे से कहते हैं कि सिर्फ युवा पीड़ी ही नहीं, 30 से 35 साल तक की उम्र वाले युवाओं को भी इसकी जानकारी नहीं है.    जॉन बताते हैं कि उनकी माँ उस वक़्त बहुत रोइ थी, जब राजीव गाँधी जी का देहांत हुआ था. उस घटना का असर जॉन पर लम्बे समय तक था. यही वह कारण था कि, जॉन ने 'मद्रास कैफ़े' जैसी फिल्म बनाई थी. जॉन ने बताया कि मद्रास कैफ़े के अच्छे इम्प्रैशन की वजह से उन्हें फिल्म के बारे में ज्यादा रिसर्च करने में दिक्कत नहीं हुई.

जॉन ने बताया कि इस तरह के विषय पर फिल्म इसिलए भी बनना ज़रूरी थी क्योंकि आज भी आधे से ज्यादा भारत के लोग परमाणु का मतलब नहीं जानते. भारत में रह रहे आधे से ज्यादा लोगों को तो यह भी नहीं पता है कि पोखरण में हुआ क्या था. जॉन दावे से कहते हैं कि सिर्फ युवा पीड़ी ही नहीं, 30 से 35 साल तक की उम्र वाले युवाओं को भी इसकी जानकारी नहीं है.

जॉन बताते हैं कि उनकी माँ उस वक़्त बहुत रोइ थी, जब राजीव गाँधी जी का देहांत हुआ था. उस घटना का असर जॉन पर लम्बे समय तक था. यही वह कारण था कि, जॉन ने ‘मद्रास कैफ़े’ जैसी फिल्म बनाई थी. जॉन ने बताया कि मद्रास कैफ़े के अच्छे इम्प्रैशन की वजह से उन्हें फिल्म के बारे में ज्यादा रिसर्च करने में दिक्कत नहीं हुई.

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