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उत्तराखंड: जीआइसी के वैज्ञानिक बताएंगे यहां बनेगी कितनी बड़ी झील

रानीखेत : कोसी घाटी स्थित काकड़ीघाट को पर्यटन सर्किट से जोड़ने की कवायद फिर तेज हो गई है। इसके तहत कोसी व सिरौता नदी के संगम पर प्रस्तावित झील को मूर्तरूप देने के लिए जल्द ही भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण इकाई (जीएसआइ) के वैज्ञानिकों का दल घाटी क्षेत्र का दौरा करेगा। ताकि भूगर्भीय सर्वे एवं अध्ययन कर झील का वास्तविक क्षेत्रफल, गहराई आदि का ब्लूप्रिंट तैयार किया जा सके। 

अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर काकड़ीघाट से नावली तक पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए झील निर्माण प्रस्तावित है। कोसी व सिरौता के संगम पर करीब 800 मीटर लंबी व सौ मीटर चौड़े सरोवर को धरातल पर उतारने के लिए सिंचाई विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया था।

इधर एक बार फिर प्रगति में तेजी आ गई है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार भूगर्भीय सर्वे के लिए जीएसआइ के वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों का दल जल्द ही प्रस्तावित झील क्षेत्र का जायजा लेंगे। भूगर्भीय पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ही सरोवर का वास्तविक क्षेत्रफल तय किया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि झील से भविष्य में कोई नुकसान तो नहीं होगा, इसका भी अध्ययन किया जाएगा। भूगर्भीय सर्वे के लिए शासन ने बाकायदा 12 लाख रुपये स्वीकृत भी कर दिए हैं।

बुझेगी गांवों व खेतों की प्यास 

सटीक तकनीक व योजना के साथ झील निर्माण के लिए कदम बढ़ाए गए तो काकड़ीघाट में पर्यटन गतिविधियों तथा साहसिक खेलों के आयोजनों की संभावना तो बढ़ेगी ही। झील के पानी से कंडारखुआ पट्टी के सूरी, गड़स्यारी, सुनियाकोट, बेडगांव, ओखिना, कोटुली, डूगरां, अल्मियाकांडे समेत 40 से अधिक गांवों के उर्वर खेतों की सिंचाई भी हो सकेगी। लगे हाथ इन गांवों के लिए लिफ्टिंग योजना के जरिये अतिरिक्त पेयजल लाइन भी ली जा सकती है। 

सिंचार्इ विभाग के ईई विनोद कुमार ने बताया कि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों का दल भूगर्भीय सर्वे के लिए पहुंच रहा है। इसके बाद ही डीपीआर तैयार की जाएगी। शासन ने 12 लाख रुपये स्वीकृत कर दिए हैं। झील की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई व गहराई कितनी होगी, यह सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। 

 
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