Wednesday , December 2 2020

अलंद तालुकाः जीत का ‘चौका’ लगाने की तैयारी में बीआर पाटिल

भोजराज रामचंद्रप्पा पाटिल यानी बीआर पाटिल कर्नाटक की राजनीति में जाना-माना चेहरा है और राज्य विधानसभा के लिए अब तक 3 बार चुने जा सके हैं. पाटिल कुलबुर्गी के अलंद तालुका का प्रतिनिधित्व करते हैं. इसके अलावा वह राज्य विधान परिषद के सदस्य भी रहे जहां वह डिप्टी चेयरमैन थे.भोजराज रामचंद्रप्पा पाटिल यानी बीआर पाटिल कर्नाटक की राजनीति में जाना-माना चेहरा है और राज्य विधानसभा के लिए अब तक 3 बार चुने जा सके हैं. पाटिल कुलबुर्गी के अलंद तालुका का प्रतिनिधित्व करते हैं. इसके अलावा वह राज्य विधान परिषद के सदस्य भी रहे जहां वह डिप्टी चेयरमैन थे.  पाटिल कर्नाटक की क्षेत्रीय पार्टी 'कर्नाटक जनता पार्टी' के नेता थे, लेकिन पिछले साल जून में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया.  पार्टी में फूट के बाद कांग्रेस में पहुंचे  पाटिल ने 'कर्नाटक जनता पार्टी' का गठन 9 दिसंबर 2012 को किया गया था, फिर 2014 में इसका पुनर्गठन कर दिया गया. हालांकि पद्मानाभा प्रसन्ना ने 2008 में ही पार्टी रजिस्टर्ड करवा ली थी, लेकिन नवंबर, 2012 में येदियुरप्पा के बीजेपी से त्यागपत्र देने और पार्टी के साथ जुड़ने के बाद दिसंबर में इसका औपचारिक गठन किया गया. 2013 में येदियुरप्पा के फिर से बीजेपी के साथ जाने और नरेंद्र मोदी को समर्थन देने के ऐलान के बाद पार्टी में फूट पड़ गई. इसके बाद वह कांग्रेस से जुड़ गए.  यहां पढ़ें: कर्नाटक चुनाव की फुल कवरेज  बीआर पाटिल 1983 में पहली बार जनता पार्टी के टिकट पर अलंद के विधायक चुने गए. इसके बाद वह 2004 में जनता दल (एस) के टिकट पर विधानसभा पहुंचे. फिर उन्होंने 2013 में कर्नाटक जनता पक्ष के टिकट पर जीत हासिल की. पाटिल 3 बार विधायक चुने गए, लेकिन उन्हें लगातार 2 बार चुनाव में जीत कभी नहीं मिली. इस बार उनके लिए चुनावी समर में मुकाबला आसान नहीं माना जा रहा. ऐसे में अगर वह जीत जाते हैं तो पहली बार लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचेंगे.  अलंद बीदर लोकसभा संसदीय क्षेत्र के तहत आता है. खास बात यह है कि इस सीट पर करीब 3 दशकों से कांग्रेस या बीजेपी ने जीत हासिल नहीं की है. इस सीट से बीजेपी की ओर से सुभाष गुट्टेदार उम्मीदवारी पेश कर रहे हैं. जबकि पाटिल कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं.  पाटिल ने पिछले चुनाव में 'कर्नाटक जनता पार्टी' के टिकट पर जनता दल (एस) के सुभाष गुट्टेदार को 67,085 मतों (वोट शेयर 57.31%) के अंतर से हराकर जीत हासिल की थी.

पाटिल कर्नाटक की क्षेत्रीय पार्टी ‘कर्नाटक जनता पार्टी’ के नेता थे, लेकिन पिछले साल जून में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया.

पार्टी में फूट के बाद कांग्रेस में पहुंचे

पाटिल ने ‘कर्नाटक जनता पार्टी’ का गठन 9 दिसंबर 2012 को किया गया था, फिर 2014 में इसका पुनर्गठन कर दिया गया. हालांकि पद्मानाभा प्रसन्ना ने 2008 में ही पार्टी रजिस्टर्ड करवा ली थी, लेकिन नवंबर, 2012 में येदियुरप्पा के बीजेपी से त्यागपत्र देने और पार्टी के साथ जुड़ने के बाद दिसंबर में इसका औपचारिक गठन किया गया. 2013 में येदियुरप्पा के फिर से बीजेपी के साथ जाने और नरेंद्र मोदी को समर्थन देने के ऐलान के बाद पार्टी में फूट पड़ गई. इसके बाद वह कांग्रेस से जुड़ गए.

यहां पढ़ें: कर्नाटक चुनाव की फुल कवरेज

बीआर पाटिल 1983 में पहली बार जनता पार्टी के टिकट पर अलंद के विधायक चुने गए. इसके बाद वह 2004 में जनता दल (एस) के टिकट पर विधानसभा पहुंचे. फिर उन्होंने 2013 में कर्नाटक जनता पक्ष के टिकट पर जीत हासिल की. पाटिल 3 बार विधायक चुने गए, लेकिन उन्हें लगातार 2 बार चुनाव में जीत कभी नहीं मिली. इस बार उनके लिए चुनावी समर में मुकाबला आसान नहीं माना जा रहा. ऐसे में अगर वह जीत जाते हैं तो पहली बार लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचेंगे.

अलंद बीदर लोकसभा संसदीय क्षेत्र के तहत आता है. खास बात यह है कि इस सीट पर करीब 3 दशकों से कांग्रेस या बीजेपी ने जीत हासिल नहीं की है. इस सीट से बीजेपी की ओर से सुभाष गुट्टेदार उम्मीदवारी पेश कर रहे हैं. जबकि पाटिल कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं.

पाटिल ने पिछले चुनाव में ‘कर्नाटक जनता पार्टी’ के टिकट पर जनता दल (एस) के सुभाष गुट्टेदार को 67,085 मतों (वोट शेयर 57.31%) के अंतर से हराकर जीत हासिल की थी.

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