Thursday , November 26 2020

भाजपा के गठबंधन में दरार, विपक्ष ने उठाया फायदा

झारखण्ड में दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं, गोमिया और सिल्ली में होने वाले ये उपचुनाव आगामी राजनीति की ओर इशारा करते हैं. इस उपचुनाव में सत्तारूढ़ रघुबर दास की भाजपा सरकार और उसके समर्थक दल आजसू पार्टी के बीच तालमेल ठीक से जम नहीं पाया है.  सिल्ली विधानसभा सीट पर आजसू पार्टी के अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो के खिलाफ भाजपा ने अपने किसी उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा था.झारखण्ड में दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं, गोमिया और सिल्ली में होने वाले ये उपचुनाव आगामी राजनीति की ओर इशारा करते हैं. इस उपचुनाव में सत्तारूढ़ रघुबर दास की भाजपा सरकार और उसके समर्थक दल आजसू पार्टी के बीच तालमेल ठीक से जम नहीं पाया है.  सिल्ली विधानसभा सीट पर आजसू पार्टी के अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो के खिलाफ भाजपा ने अपने किसी उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा था.  इसके बदले में भाजपा, आजसू पार्टी से गोमिया सीट के लिए समर्थन माँगा था, लेकिन आजसू पार्टी ने भाजपा की मांग को दरकिनार करते हुए गोमिया सीट से भी अपना उम्मीदवार खड़ा कर दिया है. जिसके कारण इस गठबंधन में दरार पद चुकी है, जो आगामी चुनाव में झारखण्ड का भविष्य तय करेगी. कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि विपक्ष बेहतर तालमेल जमाकर, भाजपा को हराने में कामयाब हो सकता है.  वहीं विपक्ष ने इसका लाभ उठाते हुए भाजपा को घेरने की योजना भी बना ली है, नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने अपने स्तर से पहल कर पहली बार तमाम भाजपा विरोधी दलों को एक मंच पर खड़ा कर दिया है. झामुमो ने भी इन दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किये हैं, क्योंकि वो जानती है कि इस उपचुनाव का गहरा असर आगामी चुनावों पर पड़ने वाला है. इससे पहले भी ये दोनों सीटें झामुमों के कब्जे में रही है,  अगर इस बार भी झामुमो को इसमें सफलता मिली तो सत्तापक्ष पर जहां विपरीत असर पड़ेगा वहीं झामुमो की धाक विपक्षी दलों के बीच बढ़ेगी.

इसके बदले में भाजपा, आजसू पार्टी से गोमिया सीट के लिए समर्थन माँगा था, लेकिन आजसू पार्टी ने भाजपा की मांग को दरकिनार करते हुए गोमिया सीट से भी अपना उम्मीदवार खड़ा कर दिया है. जिसके कारण इस गठबंधन में दरार पद चुकी है, जो आगामी चुनाव में झारखण्ड का भविष्य तय करेगी. कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि विपक्ष बेहतर तालमेल जमाकर, भाजपा को हराने में कामयाब हो सकता है.

वहीं विपक्ष ने इसका लाभ उठाते हुए भाजपा को घेरने की योजना भी बना ली है, नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने अपने स्तर से पहल कर पहली बार तमाम भाजपा विरोधी दलों को एक मंच पर खड़ा कर दिया है. झामुमो ने भी इन दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किये हैं, क्योंकि वो जानती है कि इस उपचुनाव का गहरा असर आगामी चुनावों पर पड़ने वाला है. इससे पहले भी ये दोनों सीटें झामुमों के कब्जे में रही है,  अगर इस बार भी झामुमो को इसमें सफलता मिली तो सत्तापक्ष पर जहां विपरीत असर पड़ेगा वहीं झामुमो की धाक विपक्षी दलों के बीच बढ़ेगी.

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