वर्ष 2015 में संस्था ने भारत की क्रेडिट रेटिंग को ‘स्थिर’ से बढ़ाकर ‘सकारात्मक’ कर दिया था. ‘बीएए3’ न्यूनतम निवेश श्रेणी की रेटिंग थी जो ‘जंक’ दर्जे से थोड़ी ही ऊपर है. मूडी ने अपने बयान में कहा है कि भारत की रेटिंग अपग्रेड होने की वजह वहां देश में हो रहे आर्थिक सुधार हैं. जैसे-जैसे वक्त बीतता जाएगा, भारत की विकास दर में इजाफा होगा.

मूडी ने कहा है कि इस बात की भी संभावना है कि मीडियम टर्म में सरकार पर कर्ज का भार भी कम होता जाए. हमारा मानना है कि सुधारों को सही तरीके से लागू करने पर कर्ज के तेजी से बढ़ने और विकास दर कम होने का खतरा कम होगा. इसके साथ ही मूडी ने ये सलाह भी दी है कि भारत को ये ध्यान रखना चाहिए कि उसका ज्यादा कर्ज कहीं उसका क्रेडिट प्रोफाइल खराब न कर दे.

क्या होगा फायदा

क्रेडिट रेटिंग का इस्तेमाल निवेशकों, कर्ज जारी करने वाली संस्थाओं, निवेश बैंक, दलालों-व्यापारियों और सरकार द्वारा किया जाता है. क्रेडिट रेटिंग संस्थाएं निवेशकों के लिए निवेश विकल्पों के क्षेत्र को विस्तृत कर देती हैं और रिलेटिव क्रेडिट रिस्क को मापने का सरल और स्वतंत्र तरीका देती हैं. इससे आम तौर पर बाजार की कुशलता बढ़ जाती है और उधार लेने वालों और उधार देने वालों दोनों के ही लिए लागत घट जाती है.

इसके परिणाम स्वरूप अर्थव्यवस्था में जोखिम युक्त पूंजी की कुल आपूर्ति बढ़ जाती है, जो शक्तिशाली विकास की ओर ले जाती है. यह पूंजी बाजार को उस श्रेणी के उधार लेने वालों के लिए भी खोल देती है जो ऐसा न होने पर कुल मिलाकर पूंजी बाजार से बाहर हो जाते: जैसे, छोटी सरकारें, हाल में शुरू हुईं कंपनियां, अस्पताल और विश्वविद्यालय इत्यादि.