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उत्तराखंड सरकार ने किसानों को दिया होली में यह बड़ा तोहफा

खटीमा: वर्ग-3, वर्ग-4 की भूमि पर अवैध कब्जेदार और वर्ग एक(ख) भूमि के पट्टाधारकों के लिए सरकार ने भूमिधरी अधिकार देने का शासनादेश जारी कर किसानों को होली पर तोहफा दिया है। यह विनियमितीकरण शासनादेश एक साल के लिए लागू रहेगा। नए शासनादेश में शर्त रखी गई है कि विनियमितीकरण में लगने वाला नजराना निर्गत तिथि से छह माह तक जमा किया जाता है तो वर्ष 2000 के सर्किल रेट का शुल्क देना होगा। जिसके बाद वर्तमान सर्किल रेट के अनुसार शुल्क जमा होगा।

शासनादेश के बाद भूमिधरी अधिकार मिलने से सैकड़ों काश्तकार लाभान्वित होंगे। 30 जून 1983 से पूर्व वर्ग चार भूमि पर कब्जेदारों को यह लाभ मिलेगा। वर्ग एक ख की भूमि पर मालिकाना अधिकार पाने के लिए लगभग 30 वर्ष पुराना पट्टा होना चाहिए। शासनादेश जारी होते ही एसडीएम विजयनाथ शुक्ल ने पटवारियों के साथ बैठक की।

एसडीएम ने उन्हें बताया कि शासनादेश के अनुसार ऐसे काश्तकारों को लाभ दिलाने के लिए किसानों के घर-घर जाएं। उन्हें नोटिस देकर जानकारी दें यह भी बताएं कि शासनादेश जारी होने की तारीख 19 फरवरी 2018 से छह माह के अंदर विनियमितीकरण करने पर वर्ष 2000 का सर्किल रेट का शुल्क लगेगा। छह माह के बाद वर्तमान में चल रहे सर्किल रेट के अनुसार शुल्क जमा होगा। उन्होंने आवेदन पत्र के प्रारूप भी दिए।

भूमिधरी का अधिकार का शासनादेश पिछले वर्ष 2017 में समाप्त हो गया था, जिसमें वर्ग चार का शासनादेश 17 जुलाई वर्ग तीन का 21 व वर्ग एक ख का 26 जुलाई 2017 को समाप्त हो गया था। जिसके बाद कई काश्तकार भूमिधरी का लाभ लेने से वंचित रह गए थे। अब यह शासनादेश 18 फरवरी 2019 तक लागू रहेगा।

सीमांत के 339 काश्तकार भूमिधरी अधिकार का लाभ ले चुके हैं, जिसमें 268 वर्ग एक ख के पट्टाधारक व 71 वर्ग चार के कब्जेदार शामिल हैं। जो विनियमितीकरण के तहत सरकारी जमीन के मालिक बन चुके हैं।

 
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