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क्या थप्पड़कांड से डरी दिल्ली सरकार? फैसले से लेकर हर फाइल तक का रखेगी रिकॉर्ड

मुख्य सचिव से मारपीट के मामले में घिरती जा रही दिल्ली सरकार ने फैसला किया है कि वो अब हर मीटिंग का लाइव प्रसारण कराएगी. सरकार का ये फैसला किसी भी विवाद से बचने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है. इस मामले में दिल्ली पुलिस अब तक दो विधायकों को गिरफ्तार कर चुकी है. 9 और विधायकों से पूछताछ की जानी है.

सूत्रों के मुताबिक केजरीवाल सरकार ने प्रस्ताव तैयार किया है जिसके मुताबिक दिल्ली सरकार के हर मंत्री और अधिकारी द्वारा होने वाली हर सरकारी बैठक कैमरे के सामने और कैमरे की नजर में होगी जिसका लाइव प्रसारण या लाइव वेबकास्ट दिल्ली सरकार की वेबसाइट पर किया जाएगा, जिसे जनता देख सकेगी.

मुख्य सचिव ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री के घर पर बैठक के दौरान उनकी मौजूदगी में विधायकों ने उनके साथ हाथापाई की. इस तरह के आरोपों से बचने के लिए सरकार अपनी तमाम बैठकें सीधा वेबसाइट पर प्रसारित करेगी. सूत्रों के मुताबिक सिर्फ मंत्री, अधिकारी या मुख्य सचिव ही नहीं बल्कि खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री द्वारा होने वाली तमाम सरकारी बैठकें भी कैमरे के जरिए वेबसाइट पर वेबकास्ट की जाएंगी.

यहां तक कि दिल्ली सरकार की सबसे बड़ी बैठक यानी कैबिनेट की बैठक भी वेबसाइट पर प्रसारित की जाएंगी. सरकार का कोई भी अधिकारी किसी भी मंत्री या मुख्यमंत्री से मिलेगा तो उस बैठक की लाइव तस्वीरें भी वेबसाइट पर जनता के लिए मुहैया कराई जाएंगी. सरकार का दावा है कि इससे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी.

सिर्फ सरकारी बैठकें ही नहीं बल्कि केजरीवाल सरकार में लिए जाने वाले हर नीतिगत फैसलों से जुड़ी फाइलों की गतिविधियां भी जनता को पता चल सके, इसके लिए भी प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है. इसके मुताबिक किस मंत्री ने किस योजना से संबंधित फाइल पर दस्तखत करने में कितना समय लगाया या उस फाइल को पुनर्विचार के लिए भेजने से पहले क्या निर्देश दिया या उस पर क्या कमेंट लिखा, इसका भी ब्यौरा वेबसाइट पर डाला जाएगा. सिर्फ मंत्री ही नहीं बल्कि दिल्ली सरकार के किस अधिकारी ने नीतिगत फैसलों से जुड़ी फाइलों को कितने समय में मंजूरी दी या उस पर दस्तखत किए या उस फाइल को कितनी देर तक लटकाए रखा और क्यों लटकाए रखा, इसका ब्यौरा भी वेबसाइट पर सरकार मुहैया कराएगी.

सरकार के किस मंत्री या किस अधिकारी ने नीतिगत मामलों से जुड़ी फाइलों पर आपत्ति के चलते क्या निर्देश दिए या उस पर क्या कमेंट लिखा है इसका ब्यौरा भी जनता को मुहैया कराने के लिए वेबसाइट पर डाला जाएगा. सरकार के सूत्रों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में फाइलें दबाई जाती हैं और एक बार सिस्टम में फाइलों की ट्रैकिंग को जनता के बीच ले जाने के लिए पारदर्शिता बनाई गई तो यह पता चल सकेगा कि कौन सा मंत्री या कौन सा अधिकारी किन फैसलों से जुड़ी फाइलों को रोकता है. सरकार का कहना है कि इससे यह भी पता चल सकेगा की चुनी हुई सरकार द्वारा लिए गए फैसलों को अमलीजामा पहनाने में आखिर इतनी देर क्यों होती है.

केजरीवाल सरकार का प्रस्ताव तैयार होते ही मार्च में पेश होने वाले सरकार के बजट में इसका प्रावधान किया जाएगा. सरकार के इस फैसले पर बाबू कोई अड़चन ना लगा सके, इसके लिए बजट के जरिए इसे लागू करवाने की तैयारी की जा रही है और बजट में वेबकास्टिंग के लिए होने वाले अतिरिक्त खर्चे के लिए फंड भी मुहैया कराया जाएगा. जैसे ही सरकार में यह नियम लागू होगा दिल्ली की जनता को पता चल सकेगा कि आखिर चुनी हुई सरकार ने किस समय पर जनता से जुड़े कौन से फैसले लिए, कब उन फैसलों को लेकर बैठक बुलाई गई, इन बैठकों के बाद फाइल कहां तक पहुंची और फैसलों में विलंब क्यों हुआ और जनता तक उस फैसले का फायदा क्यों नहीं पहुंचा.

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