Sunday , January 24 2021

कल का शनिवार है खास, पश्चिममुखी होकर करें महाकाली का पूजन

शनिवार दि॰ 09.02.18 फाल्गुन कृष्ण दशमी संध्या के समय मूल नक्षत्र बव करण और हर्षण योग होने के कारण विशेष देवी महाकालीका का पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा। कृष्ण पक्ष और दशमी तिथि दशमहाविधा को समर्पित मानी जाती है। महाकाली दस महाविद्या में से प्रथम महाविद्या मानी जाती हैं व समस्त देवों द्वारा पूजनीय व अनंत सिद्धियों को प्रदान करने वाली हैं। इन्हें मूल प्रकृति कहा जाता है। मूलतः पार्वती ही आदिशक्ति हैं जो संसार में महाकाल शिव के साथ महाकाली रूप में प्रलय तांडव करती हैं। काल अर्थात समय का ईश्वर शिव के महाकालेश्वर स्वरुप को माना गया है तथा काल की शक्ति देवी महाकाली को कहा गया है। तंत्र शास्त्र में महाकालेश्वर व महाकाली का सर्वोच्च स्थान है। कहा जाता है कि जो महाकाल व महाकाली का भक्त है उसका काल भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता। कालिका पुराण अनुसार महामाया को ही महाकाली बताया गया है। महाकाली का जन्म मधु-कैटभ के नाश हेतु हुआ था। दशमी तिथि व मूल नक्षत्र में महाकाली के विशेष पूजन से अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है व शत्रुओं का नाश होता है। जीवन की हर मुश्किल आसान होती है।

विशेष पूजन: पश्चिममुखी होकर महाकाली का दशोपचार पूजन करें। सरसों के तेल का दीप करें, लोहबान की धूप करें, तेज पत्ता चढ़ाएं, सुरमा चढ़ाएं, लौंग, नारियल, काली मिर्च, बादाम चढ़ाएं तथा रेवड़ियों का भोग लगाकर 108 बार विशिष्ट मंत्र जपें। इसके बाद रेवड़ियां प्रसाद स्वरूप में किसी कुंवारी कन्या को बांट दें।

पूजन मुहूर्त: शाम 18:05 से शाम 19:05 तक।
पूजन मंत्र: क्रीं कुरुकुल्लायै नमः॥

उपाय
अकाल मृत्यु के भय नाश हेतु राई सिर से 13 बार वारकर महाकाली पर चढ़ाएं।

पारिवारिक जीवन की हर मुश्किल के हल हेतु काली मंदिर में 7 नींबू की माला चढ़ाएं।

शत्रुनाश हेतु शत्रुओं का नाम लेते हुए 6 लौंग सिर से 6 बार वारकर काली के निमित कर्पूर से जला दें।

Loading...

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com