Wednesday , April 14 2021

न्यूयॉर्क में मिला कोरोना का अत्यंत खतरनाक स्ट्रेन, नहीं हो रहा हैं वैक्सीन का कोई असर

ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, कैलिफोर्निया के बाद अब एकदम नए तरह का कोरोनावायरस न्यूयॉर्क में मिला है. अमेरिका के डॉक्टर और वैज्ञानिक इसे अत्यंत खतरनाक स्ट्रेन बता रहे हैं. क्योंकि ये बेहद तेजी से पूरे न्यूयॉर्क शहर में फैल रहा है. यह वायरस पिछली साल नवंबर के महीने में पहली बार सामने आया था. इसके बारे में फरवरी में पूरी दुनिया को जानकारी दी गई. आइए जानते हैं कोरोनावायरस के खतरनाक वैरिएंट के बारे में

द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार न्यूयॉर्क शहर में मिले कोरोना के नए वैरिएंट यानी स्ट्रेन का नाम है B.1.526. न्यूयॉर्क में कोरोना से संक्रमित सभी लोगों में से 25 फीसदी लोग इस नए स्ट्रेन की चपेट में हैं. यह बात फरवरी में आई जीनोम सिक्वेंसिंग रिपोर्ट में सामने आई है.

कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (CIT) के साइंटिस्ट्स के अनुसार B.1.526 पर फिलहाल बनाए गए किसी भी वैक्सीन का असर नहीं हो रहा है. इस वायरस की बाहरी कंटीली परत अन्य कोरोना वायरसों की परत से ज्यादा संक्रामक, घातक और मजबूत है. यह बहुत तेजी से मानव शरीर की कोशिकाओं से जुड़ता है. तेजी से उन्हें गलाकर RNA अंदर छोड़ देता है ताकि वायरस तेजी से अपनी संख्या बढ़ा सके.

B.1.526 कोरोनावायरस के दो और वर्जन बताए जा रहे हैं. या फिर ऐसा भी कहा जा सकता है कि इसके दो पूर्वज पहले से दुनिया में मौजूद हैं. पहला म्यूटेशन यानी वर्जन है E484K, यह वायरस फिलहाल दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में तेजी से फैल रहा है. इसकी वजह से लोगों के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ रही है. एंटीबॉडीज खत्म हो रही है. इसका नुकसान ये है कि इस वायरस से संक्रमित लोगों पर वैक्सीन का असर नहीं हो रहा है

B.1.526 वायरस की दूसरी ब्रांच यानी वर्जन या म्यूटेशन को S477N कहा जा रहा है. यह बेहद तेजी से कोशिकाओं से चिपकता है. कोलंबिया यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट्स ने भी B.1.526 स्ट्रेन की जीन सिक्वेंसिंग की थी. अस्पतालों से 1100 कोरोना मरीजों का सैंपल लिया था. इनमें से B.1.526 वायरस E484K म्यूटेशन के साथ मिला. 1100 मरीजों में से 12 फीसदी को इसी वायरस का संक्रमण हुआ था.

ऑरोन डायमंड एड्स रिसर्च सेंटर के निदेशक डॉ. डेविड हो ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में B.1.526 स्ट्रेन बेहद तेजी से लोगों को संक्रमित कर रहा है. डर इस बात का है कि कहीं ऐसा न हो कि ये स्ट्रेन पुराने स्ट्रेन की जगह लेकर महामारी का रूप ले ले. फिलहाल इस स्ट्रेन को लेकर और रिसर्च की जरूरत है

 

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