Wednesday , March 3 2021

कोरोना वैक्सीन की आस में पाकिस्तान, क्या भारत करेगा निर्यात ?

पाकिस्तान के ड्रग रेगुलेटरी अथॉरिटी (ड्रैप) ने रविवार को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविड-19 वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है. पाकिस्तान ने इस वैक्सीन को मंजूरी तो दे दी है लेकिन उसकी मुश्किल ये है कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का उत्पादन भारत के सीरम इंस्टिट्यूट में हो रहा है. पाकिस्तान द्विपक्षीय समझौते के तहत इस वैक्सीन को हासिल नहीं कर पाएगा, ऐसे में वो दूसरे विकल्प खंगालने के लिए मजबूर हो गया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान विश्व स्वास्थ्य संगठन की कोवैक्स व्यवस्था के तहत भारत में बन रही वैक्सीन हासिल कर सकता है. इसके अलावा, पाकिस्तान अगले हफ्ते चीन की सिनौफार्म की वैक्सीन को भी मंजूरी दे सकता है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के स्वास्थ्य विषय पर विशेष सहायक डॉ. फैसल सुल्तान ने कहा, हमने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को मंजूरी दी है क्योंकि इसकी प्रभावशीलता 90 फीसदी है और हम इसकी उपलब्धता सुनिश्चितता करने के लिए अन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. ड्रैप की मंजूरी के बाद हम कोवैक्स के तहत वैक्सीन हासिल कर सकते हैं.

कोवैक्स विश्व स्वास्थ्य संगठन और ग्लोबल एलायंस फॉर वैक्सीन्स ऐंड इम्युनाइजेशन की साझा पहल है. इसके तहत, 190 देशों की 20 फीसदी आबादी को फ्री वैक्सीन उपलब्ध कराने का संकल्प लिया गया है. इसमें पाकिस्तान भी शामिल है. जब डॉ. फैसल से भारत से ट्रेड बैन को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि बैन के बावजूद जीवनरक्षक दवाओं का आयात किया जा सकता है.
कोवैक्स विश्व स्वास्थ्य संगठन और ग्लोबल एलायंस फॉर वैक्सीन्स ऐंड इम्युनाइजेशन की साझा पहल है. इसके तहत, 190 देशों की 20 फीसदी आबादी को फ्री वैक्सीन उपलब्ध कराने का संकल्प लिया गया है. इसमें पाकिस्तान भी शामिल है. जब डॉ. फैसल से भारत से ट्रेड बैन को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि बैन के बावजूद जीवनरक्षक दवाओं का आयात किया जा सकता है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने डॉन से बताया कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन पाने की संभावना बहुत कम है क्योंकि भारत ने इसकी रिसर्च खरीद ली है और वहां इस वैक्सीन का उत्पादन भी हो रहा है. इसके अलावा, भारत ने ऐलान किया है कि उसकी प्राथमिकता देश के लोगों को वैक्सीन देना है. अधिकारी ने कहा, हमारे पास बस एक ही रास्ता है और वो है-कोवैक्स. इसके अलावा, चीन की सिनोफॉर्म वैक्सीन का सेफ्टी ट्रायल भी खत्म होने वाला है और अगले हफ्ते तक इसे भी मंजूरी दे दी जाएगी.

बता दें कि पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट में एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के देसी संस्करण कोविशील्ड का बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी को देश में व्यापक टीकाकरण के अभियान की शुरुआत की थी. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 447 लोगों में वैक्सीन लगाने के बाद साइड इफेक्ट देखे गए हैं.

दुनिया भर के तमाम देशों ने भारत में बन रही वैक्सीन में दिलचस्पी दिखाई है. पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को छोड़कर ब्राजील, मोरक्को, सऊदी अरब, म्यांमार, बांग्लादेश और  दक्षिण अफ्रीका जैसे कई देशों में वैक्सीन भेजी जाएगी. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने एक बयान में कहा, “कोरोना की महामारी से जंग में भारत शुरुआत से आगे रहा है. भारत इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग को, विशेष रूप से अपने पड़ोसी देशों के लिए कर्तव्य के रूप में देखता है.”

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